दर्द की अंतहीन दासतां का दूसरा नाम है मीना कुमारी

Archana Ekka
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दयानंद राय

मीना कुमारी को याद क्यों किया जाना चाहिए? बेहतर अदाकार होने के लिए या बेहतरीन शायरा होने के लिए। या फिर सबकी बेहतरी की कामना करनेवाला नेक इंसान होने के लिए। मैं उन्हें इन तीनों के लिए याद करता हूं। मालिक ने उन्हें उनकी अच्छाई का सिला दिया और वे फिल्मी दुनिया में छा गईं। बचपन मुफलिसी में गुजारने वाली मीना कुमारी एक समय लाखों-करोड़ों में खेल रहीं थीं। पर मीना कब धन की भूखी थी। वह प्रेम और समर्पण चाहती थीं। पर उनकी यह इच्छा अधूरी रह गयी। जो दूसरों की भलाई चाहता है उसे खुद की आहुति देनी होती है। शिव हलाहल पीता है और सती खुद को अग्नि को समर्पित करती है। मीना कुमारी की जिंदगी भी दर्द की एक पूरी दास्तान है। कमाल अमरोही ने उन्हें सिर्फ पैसे कमाने की मशीन समझा। वे भीतर भीतर टूटती रहीं। गुलजार पर वह भरोसा करती थीं और गुलजार उनके भरोसे पर खरे उतरे। मीना कुमारी ने अपनी लिखीं एक डायरी उन्हें सौंपी जिसमें उनकी लिखी गयीं शायरी थी। शायरी लिखकर यश कमाने की लालसा उनमें नहीं थी।

यह तो उनके भीतर की टूटन थी जो शब्दों का सहारा लेकर शायरी में अभिव्यक्ति पा रही थी। जब दर्द हद से ज्यादा बढ़ गया तो उन्होंने शराब से इसे दूर करने की कोशिश की। लोग कहते हैं कि मीना जी को शराब ले डूबी। पर मीना कुमारी शराब से ज्यादा बेवफाई न बर्दाश्त करने के कारण मरी। उनका संवेदनशील होना उनके लिए घातक साबित हुआ। वे नाज उपनाम से शायरी लिखती थीं। उनकी रचनाएं उनकी रचनात्मक उत्कृष्टता की गवाही देती रहेंगी। मीना कुमारी का बचपन दिक्कतों से भरा था। जब वह पैदा हुई तो पिता ने अनाथ आश्रम के बाहर छोड़ दिया था। हालांकि फिर मां की जिद पर वह उन्हें घर लेकर आए। घर के हालात ऐसे थे कि मीना ने बासी रोटियां खाकर बचपन गुजारा। घर की मजबूरी ऐसी थी कि मीना जैसे ही 4 साल की हुईं, पिता ने उन्हें चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में कैमरे के सामने खड़ा कर दिया और वह पैसे कमाने की मशीन बन गई। 7 साल की उम्र में गृहस्थी की गाड़ी खींचने का पूरा जिम्मा उनके कंधों पर आ गया।

पति मिले कमाल अमरोही जैसे, जिन्होंने उनको बुलंदी के शिखर पर तो पहुंचाया लेकिन इतने दर्द दिए कि बाहर से चमकने वाली उनकी ज़िंदगी स्याह अंधेरे से भर गई और वह टूटती चली गईं। मीना के रिश्ते कई लोगों के साथ रहे लेकिन उन्हें धोखे के सिवा कुछ न मिला। दुनियावी दर्द ने मीना कुमारी को इतना तोड़ दिया कि आखिरकार उन्होंने इश्क कर लिया शराब से। शराब के नशे में वह इस कदर डूबती चली गईं कि बहुत जल्द उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी ज़िंदगी गमों से इस कदर भरी थी कि उनकी मौत पर अभिनेत्री नरगिस ने उर्दू की मैगज़ीन में एक आर्टिकल लिखकर उन्हें मुबारकबाद दी। इसमें उन्होंने मीना को उनकी मौत की मुबारकबाद देते हुए कहा था कि ‘खबरदार, इस दुनिया में दोबारा कदम न रखना।’ कलाकार कभी नहीं मरता। वह अपनी कला में जीवित रहता है। मीना जी भी अपनी कलाकारी की वजह से अमर हैं।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।