परस्पर सम्मान का यही भाव स्वस्थ और परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है

झारखंड विधानसभा की सर्वदलीय बैठक से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के जोहार ने राजनीतिक मतभेदों के बीच लोकतांत्रिक सम्मान और सौहार्द का संदेश दिया।

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दयानंद राय

यह तस्वीर आज की है और झारखंड विधानसभा की है। विधानसभा में सर्वदलीय बैठक से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदरपूर्वक झुककर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का अभिवादन किया। देशज भाषा में कहें तो सम्मान देते हुए जोहार कहा। बदले में बाबूलाल मरांडी ने भी उनका अभिवादन स्वीकार करते हुए उन्हें जोहार कहा। यह तस्वीर परिपक्व और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखनेवाले नेताओं की है। यह तस्वीर बताती है कि विरोधी दलों के होने के बावजूद, बयानों में एक-दूसरे की आलोचना के बावजूद दोनों नेताओं में मनभेद नहीं है। एक-दूसरे के प्रति सम्मान है और समयानुसार उसका प्रकटीकरण भी दोनों नेता करते हैं।

सच तो ये है कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान की यह भावना ही लोकतंत्र को मजबूती देती है और झारखंड के आगे बढ़ने में सहायक भी है। झारखंड में जैसे ही सरकार बदलती है, जो दल सत्ता में आता है वो जनता के हित को ताक पर रखकर बीती सरकार की योजनाओं को बंद करने में यकीन रखता है, चाहे वह जनता के लिए फायदेमंद ही क्यों न हों। जबकि होना यह चाहिए एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए राजनीतिक दलों को एक-दूसरे के प्रति आरोप प्रत्यारोप से बढ़कर जनता के हित में काम करने का भाव रखना चाहिए। हालांकि आज देश में राजनीति का जो स्तर है उसमें ऐसा होने की उम्मीद रखना ही बहुत बड़ा आश्चर्य होगा लेकिन अगर नेतागण एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं तो यह भी कम अच्छी बात नहीं है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।