ऑक्सीजन रिपोर्ट : सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली सरकार पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली: ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट पर विवाद गहरा गया है।

पांच सदस्यीय कमेटी में दिल्ली सरकार द्वारा नामित सदस्यों डॉ. संदीप बुद्धिराजा और भुपिंदर एस भल्ला की असहमति अंतरिम रिपोर्ट में शामिल न किए जाने से रिपोर्ट की निष्पक्षता पर ही सवाल उठ गया है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह भी पैदा हो रहा है कि अगर इस अंतरिम रिपोर्ट को सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखा जाता है तो इस पर अदालत का रुख क्या हो सकता है? इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में 30 जून को अगली सुनवाई होगी।

क्या है विवाद

दरअसल, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने शुक्रवार को ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की मांग चार गुना बढ़ाकर बताई।

अपने इस आरोप के लिए उन्होंने कमेटी की उस रिपोर्ट को आधार बनाया जिसमें कहा गया है कि दिल्ली की ऑक्सीजन की कुल डिमांड 289 मिट्रिक टन ही थी (ऑक्सीजन की यह अनुमानित मांग केंद्र सरकार के फॉर्मूले के आधार पर थी, जिसमें यह आधार माना गया है कि कुल नॉन-आईसीयू मरीजों के लगभग 50 फीसदी को ही ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है)।

लेकिन दिल्ली सरकार ने अपने लिए इसी दौरान 1140 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की।

लेकिन अगर इसी ऑक्सीजन की मांग को दिल्ली सरकार के फॉर्मूले के आधार पर आंका जाए तो यही मांग 289 मिट्रिक टन से बढ़कर 391 मिट्रिक टन पहुंच जाती है।

दिल्ली सरकार का फॉर्मूला यह था कि आईसीयू मरीजों के साथ-साथ सभी नॉन-आईसीयू मरीजों (100 फीसदी) को भी ऑक्सीजन की आवश्यकता है।

ये अस्पताल हैं जिम्मेदार

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ी मांग के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

दिल्ली सरकार की ऑक्सीजन की मांग चार बड़े अस्पतालों द्वारा भारी ऑक्सीजन की मांग करने पर आधारित थी।

दिल्ली सरकार ने तो केवल अस्पतालों की इसी मांग को केंद्र तक पहुंचाने का काम किया था।

ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली सरकार पर नहीं, उन चार अस्पतालों पर उठता है जिन्होंने ऑक्सीजन की भारी मांग बताई।

उन्हें यह बताना होगा कि उन्होंने ऑक्सीजन की इतनी भारी मांग किस आधार पर दिखाई? कमेटी ने रिपोर्ट में चार अस्पतालों का नाम लेते हुए कहा है कि इन अस्पतालों ने अप्रत्याशित ढंग से ऑक्सीजन की भारी मांग की जबकि उनके पास उतनी संख्या में गंभीर मरीज ही नहीं थे।

रिपोर्ट में अरुणा आसफ अली अस्पताल, ईएसआईसी मॉडल हॉस्पिटल, लाइफरे हॉस्पिटल और सिंघल अस्पताल पर भारी ऑक्सीजन मात्रा में ऑक्सीजन की मांग करने का आरोप लगाया गया है।

यहां है विवाद

कथित तौर पर मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संदीप बुद्धिराजा ने ऑक्सीजन कमेटी की बैठकों के दौरान अपनी यह असहमति जताई थी, लेकिन उनका यह सुझाव रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया।

कमेटी के सदस्यों में इस बात पर असहमति इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि 18 मई को कमेटी के सदस्यों की बैठक में डॉ. संदीप बुद्धिराजा शामिल भी नहीं हुए।

इसी प्रकार दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव (गृह) भुपिंदर एस भल्ला ने भी कमेटी की बैठकों के दौरान अपनी असहमति जताते रहे।

उन्होंने ऑक्सीजन की कुल मांग के लिए दिल्ली सरकार के फॉर्मूले को पेश करते हुए अन्य सदस्यों की राय से अपनी असहमति भी जताई थी।

लेकिन आरोप है कि उनके सुझाव को भी उचित महत्व नहीं दिया गया।

हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं। हमारी पत्रकारिता को किसी भी दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।
Back to top button