चिंतामुक्त करियर के लिए कैब में महिलाओं की सुरक्षा आवश्यक: एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने ऐप आधारित कैब सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया। आयोग ने पुलिस सत्यापन, पैनिक बटन और त्वरित कार्रवाई की सिफारिश की।

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत में जैसे-जैसे महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, उन्हें ऐप-आधारित कैब सेवाओं का उपयोग करते समय सुरक्षित महसूस होना चाहिए और संचालकों को तनावमुक्त सफर करने के लिए सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। रहाटकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि महिला यात्रियों की सुरक्षा पर आयोग की सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना अपने पेशेवर करियर को आगे बढ़ा सकें।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने पिछले माह ऐप-आधारित और डिजिटल परिवहन सेवाओं का उपयोग करने वाली महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें चालकों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन, सभी कैब में आपातकालीन सहायता के लिए पैनिक बटन, रात में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तथा मार्ग बदलने या संदिग्ध रूप से वाहन रोके जाने की तत्काल सूचना देने की सिफारिश की गई है।

इसके अलावा, चौबीसों घंटे संचालित नियंत्रण केंद्र, आपातकालीन संकेत मिलने पर 60 सेकंड के भीतर कार्रवाई और उत्पीड़न व दुर्व्यवहार की शिकायतों के समयबद्ध निपटारे का भी सुझाव दिया गया है। राहटकर ने कहा कि देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और उनके काम पर आने-जाने के दौरान सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना कि कार्यबल में उनके लिए अवसरों का विस्तार करना। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि कैब के संबंध में हमने जो कदम उठाया है, वह बेहद उपयोगी साबित होगा। हमारे देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घर को संभालते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रही हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।’’

राहटकर ने कहा कि रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक बना दिया है ताकि वे बिना किसी डर के काम कर सकें। उन्होंने चार श्रम संहिताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे महिलाओं को कई अधिकार प्रदान करती हैं तथा कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं को दर्शाती हैं। राहटकर ने स्पष्ट किया कि रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके संबंधित संस्थानों या संगठनों की है।

उन्होंने कहा, ‘‘श्रम संहिताएं अब महिलाओं को रात्रि पाली में काम करने की अनुमति देती हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके संबंधित संगठनों की है। इस तरह के कई बदलाव हो रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि आयोग ने यह महसूस किया कि जैसे-जैसे अधिक महिलाएं काम के सिलसिले में घरों से बाहर निकल रही हैं और आने-जाने के लिए ऐप-आधारित कैब तथा परिवहन के अन्य साधनों पर निर्भर हो रही हैं, वैसे-वैसे उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता है।राहटकर ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे द्वारा किए गए प्रयास बहुत प्रभावी साबित होंगे। इन सिफारिशों पर उचित विचार किया जाएगा और मुझे उम्मीद है कि इन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।’’

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।