ओडिशा में ‘अर्नब’ के बाद ‘मुरासु’ चक्रवात की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ी, फसलों को भारी नुकसान

ओडिशा में अर्नब चक्रवात की तबाही के बाद अब मुरासु चक्रवात के खतरे से किसानों की बढ़ी चिंता, भारी बारिश से धान की फसलों को भारी नुकसान का अंदेशा।

Razi Ahmad
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ब्रह्मपुर: ओडिशा में पिछले सप्ताह अर्नब चक्रवात के कारण हुई भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब किसान पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहे ‘मुरासु’ चक्रवात के संभावित खतरे को लेकर चिंतित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अर्नब चक्रवात के कारण हुई भारी बारिश से गंजाम, कंधमाल और गजपति जिलों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को हुआ है, खासकर गंजाम जिले में।

मौसम वैज्ञानिकों ने मुरासु चक्रवात के प्रभाव से सोमवार से बुधवार के बीच दक्षिणी ओडिशा के गंजाम और गजपति सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। चक्रवात के मंगलवार रात आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है।

बारिश के नए दौर के पूर्वानुमान से उन किसानों की चिंता बढ़ गई है, जो अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

गंजाम जिले के कुकुडाखंडी प्रखंड के बैगनाबाड़ी गांव के किसान निरंजन मोहंती पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के बाद जलमग्न हुए अपने खेत से पानी निकालकर धान की खड़ी फसल को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

मोहंती अब अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने क्षेत्र में एक बार फिर बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है।

गंजाम जिले के शेरगड़ा प्रखंड के टकराड़ा गांव के किसान समीर कुमार प्रधान ने कहा, ”मेरी करीब 10 एकड़ जमीन में खड़ी धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। खेत से अब तक पानी नहीं निकल पाया है। बारिश का नया दौर धान की जड़ों को सड़ा देगा।”

पत्रापुर प्रखंड के समंतियापल्ली गांव के किसान शंकर कुमार पति ने कहा, ”अगर मुरासु चक्रवात के प्रभाव से जिले में फिर बारिश होती है तो धान की पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।”

आंध्र प्रदेश में 28 अक्टूबर को दस्तक देने वाले अर्नब चक्रवात के बाद हुई अत्यधिक भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान का आकलन अभी नहीं किया गया है। हालांकि, कृषि अधिकारियों ने करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित होने का अनुमान लगाया है।

सितंबर के अंतिम सप्ताह में भारी बारिश और उसके बाद आई बाढ़ के कारण इस तटीय जिले में 3,402 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई थीं।

चालू खरीफ मौसम में गंजाम जिले में करीब 2.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई थी।

मुख्य जिला कृषि अधिकारी (सीडीएओ) मनोरंजन राउल ने कहा कि प्रशासन अर्नब चक्रवात के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने की तैयारी कर रहा था, तभी आईएमडी ने जिले में और बारिश होने का पूर्वानुमान जारी कर दिया।

राउल ने कहा, ”अब हमने मौसम साफ होने के बाद नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण कराने की योजना बनाई है।”

इस बीच, सरकार ने बाढ़ प्रबंधन, नुकसान का समय पर आकलन और पुनर्बहाली के लिए जिला प्रशासन की मदद करने के वास्ते 145 अतिरिक्त कृषि अधिकारियों को तैनात किया है। इनमें छह प्रखंड कृषि अधिकारी, 55 कृषि पर्यवेक्षक, 30 ग्राम कृषि कार्यकर्ता और 35 बागवानी पर्यवेक्षक शामिल हैं।

गंजाम जिले के एक किसान ने भारी बारिश से फसल बर्बाद होने के कारण कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दक्षिणी जिलों में हाल की बारिश और बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार को 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये की विशेष सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा अर्नब चक्रवात के कारण फसलों और संपत्ति को हुए नुकसान के लिए भी मुआवजा देने की घोषणा की गई है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।