

नई दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से वेनेजुएला में परिचालन फिर से पूरी तरह शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इससे कंपनी के वेनेजुएला स्थित तेल निवेश से जुड़े प्रतिबंधों का एक बड़ा अवरोध दूर हो गया है। ओएनजीसी के निदेशक (वित्त) अनुपम अग्रवाल ने पहली तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिकी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी को वेनेजुएला की परियोजनाओं में काम करने की पूरी आजादी मिल गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों के कारण कंपनी पहले वहां अपनी गतिविधियों को सीमित कर रही थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।





ओएनजीसी की विदेशी निवेश इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) की सैन क्रिस्टोबल तेल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शेष हिस्सेदारी वेनेजुएला की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी पेट्रोलियोज डी वेनेजुएला एस.ए. (पीडीवीएसए) के पास है। इसके अलावा ओवीएल की विकासाधीन काराबोबो परियोजना में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है।ओएफएसी की मंजूरी से ओएनजीसी को अपनी वेनेजुएला परियोजनाओं के वित्तीय संचालन में सुविधा मिलेगी और कंपनी 50 करोड़ डॉलर से अधिक के लंबित लाभांश की वसूली भी कर सकेगी। अग्रवाल के अनुसार, ओएनजीसी वेनेजुएला के अधिकारियों और संयुक्त उद्यम भागीदारों के साथ सैन क्रिस्टोबल तथा काराबोबो परियोजनाओं को लेकर बातचीत कर रही है।
कंपनी को जल्द ही नए समझौतों और कुछ परियोजनाओं का परिचालन नियंत्रण पीडीवीएसए से अपने हाथ में मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी अब इन परियोजनाओं में निवेश बढ़ाकर तेल उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में है। सैन क्रिस्टोबल परियोजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.65 लाख टन तेल समकक्ष उत्पादन किया था, जो इसकी संभावित उत्पादन क्षमता का लगभग दसवां हिस्सा है। वेनेजुएला ओएनजीसी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ओपेक के अनुसार, देश के पास करीब 303 अरब बैरल के प्रमाणित कच्चे तेल भंडार हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। हालांकि, वर्षों से जारी कम निवेश, प्रतिबंधों और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण वहां उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
