
राजीव ओझा
ऑपरेशन सिंदूर को अब एक साल पूरा होने वाला है। इस दौरान कई तरह के दावे और नैरेटिव सामने आए, लेकिन समय के साथ अधिकांश सवालों के जवाब भी मिल गए। खासकर यह कि कैसे भारतीय वायु सेना ने महज 25 मिनट की कार्रवाई में पाकिस्तान पर दबाव बना दिया और आखिर तीन दिन के भीतर सीजफायर की नौबत क्यों आ गई। यही किसी भी सफल सैन्य रणनीति और कूटनीति की पहचान होती है। आज जब दुनिया रूस-यूक्रेन और अमेरिका, इजरायल-ईरान जैसे संघर्षों को देख रही है, तो यह समझना आसान है कि युद्ध का विस्तार कितना महंगा और जटिल हो सकता है। ऐसे में 7 मई को किए गए ऑपरेशन सिंदूर की 25 मिनट की कार्रवाई अपने आप में एक अलग मिसाल बनकर सामने आई।
भारतीय वायु सेना का यह ऑपरेशन 6-7 मई 2025 की रात को हुआ और सिर्फ 25 मिनट तक चला। लेकिन इसके असर कई दिनों तक महसूस किए गए। पाकिस्तान में 10 मई तक बेचैनी बनी रही। इसके बाद वहां से अलग-अलग दावे और कथित “नैरेटिव” सामने आने लगे, लेकिन वे ज्यादा देर टिक नहीं पाए।इस हमले में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और करीब 25-30 मिनट में नौ ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। यही 25 मिनट पाकिस्तान के हर तरह के प्रोपेगेंडा पर भारी पड़ गए। कहा जाता है कि उस दौरान पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व को भी सुरक्षित ठिकानों में जाना पड़ा। दुनिया के सामने यह साफ संदेश गया कि 7 मई 2025 को भारत ने सिर्फ जवाब नहीं दिया, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत दिया। सिर्फ तीन दिन-7, 8 और 9 मई-की सटीक कार्रवाई ने दुश्मन की योजनाओं को पूरी तरह से कमजोर कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से “फेक नैरेटिव” चलाने की कोशिश हुई, लेकिन सबूतों और स्वतंत्र विश्लेषणों के सामने वह टिक नहीं सका।
एक साल बाद भी ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा होती है, क्योंकि जो मैदान में साबित होता है, वही सबसे बड़ा सच होता है। और इस मामले में भारत की बढ़त को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा गया।यह ऑपरेशन सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भी दिखाता है कि आज के दौर में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि जानकारी और धारणा के स्तर पर भी लड़ा जाता है। इस मोर्चे पर भी भारत ने बढ़त बनाई। उपलब्ध साक्ष्य और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) जैसे विश्लेषणों ने ऑपरेशन की सफलता को और मजबूत किया। सैटेलाइट तस्वीरों ने भी कई दावों की सच्चाई सामने ला दी। ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय वायु सेना के इतिहास में शौर्य, रणनीति और सटीकता के एक अहम अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यह पराक्रम, precision और psychological dominance का एक उदाहरण बन गया है।
इस ऑपरेशन ने यह भी साबित किया कि अंत में जीत तथ्यों और सबूतों की ही होती है, न कि प्रोपेगेंडा की। 25 मिनट में बदली तस्वीर इस बात का संकेत है कि Speed और Strategy का सही इस्तेमाल कितना बड़ा असर डाल सकता है। इतिहास के लिए 7, 8 और 9 मई सिर्फ तारीखें नहीं हैं, बल्कि एक संतुलित और योजनाबद्ध जवाब के उदाहरण हैं। इस दौरान पाकिस्तान की ओर से कई दावे किए गए, लेकिन उनकी पुष्टि कमजोर रही। ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की ओर से अलग-अलग कहानियां सामने आईं, लेकिन समय के साथ वे खुद ही कमजोर पड़ गईं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह समझ बढ़ी कि भारत ने न सिर्फ सैन्य कार्रवाई की, बल्कि नैरेटिव को भी नियंत्रित रखा।
यह ऑपरेशन यह भी दिखाता है कि आज के युद्ध में सूचना का महत्व कितना बढ़ गया है। भारत ने इस क्षेत्र में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। एक साल बाद भी संदेश साफ है-भारत बिना शोर किए, सीधे परिणाम देता है। ऑपरेशन सिंदूर इसी सोच और रणनीति का प्रतीक बन चुका है।

