
‘ओएमजी 2’ की सफलता के बाद अभिनेता पंकज त्रिपाठी एक बार फिर निर्देशक अमित राय के साथ फिल्म ‘ओह माइ डॉग’ में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म इंसान और श्वानों (कुत्तों) के बीच के भावनात्मक रिश्ते पर आधारित है। हाल ही में मुंबई में आयोजित ट्रेलर लॉन्च के दौरान पंकज ने फिल्म के साथ-साथ अपने जीवन से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए।
श्वानों से डरते थे पंकज त्रिपाठी
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि आज भले ही उनके घर में दो पालतू श्वान हैं, लेकिन शुरुआत में वह उनसे काफी डरते थे। अभिनेता ने कहा कि जब उनकी पत्नी और बेटी घर में दो श्वान लेकर आईं, तो शुरुआती सात दिन उनके लिए बेहद तनावपूर्ण रहे। गांव में उनका अनुभव केवल उन कुत्तों तक सीमित था, जो घर के बाहर रहते थे। इसलिए घर के भीतर पालतू श्वानों के साथ रहना उनके लिए नया और चुनौतीपूर्ण अनुभव था।
वर्तमान में जीने की सीख देते हैं श्वान
अपने अनुभव साझा करते हुए पंकज ने कहा कि समय के साथ उनका डर पूरी तरह खत्म हो गया। उन्होंने महसूस किया कि श्वान इंसानों को वर्तमान में जीना सिखाते हैं। उनके अनुसार, इंसान वर्षों पुरानी नाराजगी और दुख को मन में संजोकर रखता है, जबकि श्वान वर्तमान में जीते हैं। यदि उन्हें डांटा भी जाए, तो कुछ ही मिनटों बाद वे फिर उसी प्रेम और अपनापन के साथ आपके पास लौट आते हैं। यही गुण उन्हें बेहद खास बनाता है।
दोस्ती में की फिल्म, नहीं ली फीस
पंकज त्रिपाठी ने खुलासा किया कि उन्होंने ‘ओह माइ डॉग’ के लिए कोई फीस नहीं ली। उन्होंने कहा कि निर्देशक अमित राय के साथ उनकी दोस्ती काफी पुरानी है और इसी रिश्ते के कारण उन्होंने फिल्म में काम किया। हालांकि, वह नहीं चाहते थे कि यह बात सार्वजनिक हो। अभिनेता ने कहा कि जिस तरह वह पशुओं के लिए किए गए अपने सामाजिक कार्यों का प्रचार नहीं करते, उसी तरह इस फैसले को भी निजी रखना चाहते थे।
फिल्म में छोटा लेकिन अहम किरदार
अभिनेता ने बताया कि फिल्म में उनका किरदार बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन कहानी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म किसी बड़े स्टारडम पर नहीं, बल्कि दो श्वानों और एक बच्चे की भावनात्मक कहानी पर आधारित है। फिल्म में पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार, गीता अग्रवाल शर्मा और अमित राय के बेटे माही राय भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
बेटी को संघर्ष का महत्व सिखाते हैं पंकज
पंकज त्रिपाठी ने अपनी बेटी आशी के अभिनय करियर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अभिनय में रुचि रखती है, लेकिन वह उसे संघर्ष का महत्व समझाते हैं। अभिनेता के अनुसार, सफलता का असली आनंद तभी मिलता है जब व्यक्ति अपने दम पर मेहनत करके आगे बढ़ता है। इसलिए वह चाहते हैं कि उनकी बेटी भी अपने हिस्से का संघर्ष स्वयं करे।
‘कुत्ता’ नहीं, ‘श्वान’ कहना पसंद करते हैं पंकज
ट्रेलर लॉन्च के दौरान पंकज त्रिपाठी ने ‘कुत्ता’ शब्द की जगह ‘श्वान’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि हिंदी सिनेमा ने कई बार ‘कुत्ता’ शब्द को गाली के रूप में प्रस्तुत किया है, जबकि यह एक सामान्य और सम्मानजनक शब्द है। उनके अनुसार, यह फिल्म दो न बोल पाने वाले श्वानों की ऐसी कहानी है, जो हर उम्र के दर्शकों को भावुक और प्रेरित कर सकती है।

