पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों की : एसीएस

Archana Ekka
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आईपीएच नामकुम में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए जगह, मशीन और डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

रांची में अल्ट्रासाउंड सेंटर पर हुई कार्रवाई पर संतोष जताया

रांची : पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम का राज्य में कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए अपर मुख्य सचिव (एसीएस) ने स्पष्ट किया है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है। वह गुरुवार को नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में आयोजित एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नियमों का अनुपालन अनिवार्य है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन में पारदर्शिता बरती जाए। किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र को संचालित करने के लिए उसकी जगह, इस्तेमाल में लाई जा रही मशीन और वहां कार्यरत डॉक्टर तीनों का अलग-अलग एवं अनिवार्य रूप से पंजीकरण होना चाहिए। बिना पूर्ण और वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहे सेंटरों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, एसीएस ने हाल ही में रांची जिला प्रशासन द्वारा अवैध और अनियमितता बरतने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की और इस पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने अन्य जिलों के अधिकारियों को भी इसी तरह सक्रियता दिखाते हुए लगातार निरीक्षण करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने को कहा।

वहीं नेशनल हेल्थ मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि लिंगानुपात में झारखंड की स्थिति राष्ट्रीय अनुपात की तुलना में बेहतर है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में सुधार हो रहा है। कहा कि केवल सरकार या विभाग भ्रूण हत्या पर रोक नहीं लगा सकता। इसके लिए हर किसी को जागरूक होना होगा। साथ ही मानसिकता में भी बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लिंग जांच के बाद ही अपराध पनपता है। इसके बाद माता-पिता या परिवार का सदस्य ही भ्रूण हत्या करवा देता है। इसलिए जिम्मेदार लोग सख्ती से नियमों का पालन कराए। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट लेवल पर भी सेंसीटाइजेशन प्रोग्राम आयोजन करने की जरूरत है। इससे केंद्र संचालन करने वाले डॉक्टर, स्टाफ और लोगों को भी नियमों की जानकारी होगी।

अभिज्ञान निदेशक ने कहा कि सभी सिविल सर्जन, मजिस्ट्रेट और महिला पुलिस पदाधिकारी को इस कार्यशाला में जानकारी दी गई। लिंग भेद को हमारे समाज से पूरी तरह मिटाना है। उन्होंने कहा कि भ्रूण हत्या अपराध की सबसे बड़ी श्रेणी में आता है। इसलिए राज्य भर में इसे रोकने का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने संदेश दिया कि बेटी को बचाओ दुनिया बचाओ।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।