तिरुवनंतपुरम : केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष एवं बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से कथित भुगतान के मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन और उनके परिजनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय प्रारंभिक जांच कराने के राज्य सरकार के शुरुआती फैसले को लेकर हो रही आलोचना उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के बाद कम हो जाएगी।
जोसेफ ने कानूनी कार्यवाही में धैर्य रखने की अपील करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘न्याय करने में जल्दबाजी से न्याय ही प्रभावित होता है।’’

पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य पुलिस को पत्र लिखकर सीएमआरएल की ओर से कथित तौर पर किए गए भुगतान के सिलसिले में विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पी. ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय प्रारंभिक जांच कराने का फैसला किया था। सरकार के इस फैसले को एक व्यक्ति ने केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया था।
केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर को विजयन, वीणा और रियास की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। खंडपीठ ने कहा था कि ‘‘भ्रष्टाचार के किसी मामले में आरोपी को प्राथमिकी दर्ज किए जाने से पहले अपना पक्ष रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।’’ उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विजयन और अन्य लोगों को नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील करने की हाल में अनुमति दी। विजयन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच कराने के राज्य सरकार के शुरुआती फैसले को लेकर पार्टी के भीतर भी आलोचना हुई थी। इस आलोचना के बारे में पूछे जाने पर जोसेफ ने कहा कि सरकार और केपीसीसी ने पार्टी के विधायक दल के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी लोग समझ जाएंगे। जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है। कानूनी कार्यवाही को पूरा समय दिया जाना चाहिए। मामले की जांच की जा सकती है।’’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद आलोचना से निपटने में मदद मिलेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं कन्नूर से सांसद के. सुधाकरन की ओर से की गई आलोचना के बारे में पूछे जाने पर जोसेफ ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला अब समाप्त हो चुका है। जोसेफ ने कहा, ‘‘वह वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य हैं। मैंने आज अखबारों में पढ़ा कि उन्होंने अपनी पोस्ट हटा ली है।’’
वह सुधाकरन द्वारा फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश का जिक्र कर रहे थे, जिसे बाद में हटा दिया गया था। वीडियो में सुधाकरन ने आरोप लगाया था कि पिछले साल उन्हें बिना किसी उचित कारण के केपीसीसी अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो उसकी गलतियां बताने के लिए तैयार हों। जोसेफ ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से आने वाली रचनात्मक आलोचना और सुझावों का स्वागत है, लेकिन उन्होंने सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सरकार की सार्वजनिक आलोचना को हतोत्साहित करता हूं। अनुशासित तरीका यही है कि आलोचना पार्टी के भीतर की जाए।’’


