नयी दिल्ली : ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के ‘आदर्श ग्राम’ घटक के तहत गत चार साल में 22 राज्यों के 13,959 गांवों में कुल 1.74 लाख विकास कार्यों की पहचान की गई और अब तक इनमें से 43,802 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत किये गए आवेदन में यह जानकारी दी गई है। पीएम-अजय एक केंद्र-प्रायोजित योजना है, जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा देश भर में अनुसूचित जाति समुदायों के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए लागू किया गया है।

‘आदर्श ग्राम’ घटक का उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं की कमियों को दूर कर उनके विकास को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिन गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है और कुल जनसंख्या 500 या उससे अधिक है, वे इस योजना के तहत चयन के लिए पात्र हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश 41,949 कार्यों की सर्वाधिक संख्या के साथ सबसे आगे रहा। इनमें से 2,282 कार्य पूरे हो चुके हैं, जो 5.5 प्रतिशत की औसत पूर्णता दर को दर्शाता है।

आरटीआई आवेदन के तहत मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बाद तमिलनाडु का स्थान रहा, जहां 33,881 कार्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 6,856 कार्य पूरे हो चुके हैं; वहीं मध्य प्रदेश में 19,924 कार्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 6,034 कार्य पूरे हुए। इनके कार्य पूरे होने की औसत दर क्रमशः 20.6 प्रतिशत और 34.8 प्रतिशत रही। आंकड़ों के मुताबिक पीएम-अजय योजना के तहत ओडिशा में 18,110 कार्यों की पहचान की गई, जिनमें से 8,642 पूरे हो चुके हैं जबकि कर्नाटक में 15,706 कार्यों की पहचान की गई और 6,901 कार्य पूरे हो चुके हैं। राजस्थान में 7,131 विकास कार्यों की पहचान की गई, जिनमें से 3,756 पूरे हो चुके हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 8,953 कार्यों की पहचान की गई और 3,403 कार्य पूरे किए गए।
मुहैया कराई गई जानकारी के मुताबिक पीएम-अजय के तहत आंध्र प्रदेश में 5,375 कार्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 384 पूरे हो चुके हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में स्वीकृत 7,354 कार्यों में से 1,950 कार्यों के पूरा होने की बात बताई गई। महाराष्ट्र में 3,089 कार्यों की पहचान की गई और 873 कार्य पूरे किए गए, जबकि असम में 2,821 कार्यों की पहचान की गई और 893 कार्य पूरे किए गए। आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई जानकारी के मुताबिक जम्मू और कश्मीर में 2,066 कार्यों की पहचान की गई, जिनमें से 160 पूरे हो चुके हैं। पंजाब में 1,178 कार्यों की पहचान की गई और 113 पूरे हुए, जबकि झारखंड में 175 कार्यों की पहचान की गई, लेकिन एक भी कार्य पूरा नहीं हुआ।
आरटीआई के जवाब में उन गांवों का विवरण भी दिया गया, जिन्हें ‘आदर्श ग्राम’ घटक के तहत चुना गया था और जिन्हें बाद में ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया। किसी गांव को ‘आदर्श ग्राम’ तब घोषित किया जा सकता है, जब वह विकास के निर्धारित पैमानों पर 100 में से कम से कम 70 अंक प्राप्त कर ले और ‘खुले में शौच मुक्त’ का दर्जा हासिल कर ले। वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस योजना के तहत 11,332 गांवों का चयन किया गया था, जबकि 2023-24 और 2024-25 में कोई नया चयन नहीं हुआ। 2025-26 में 17,451 गांवों का चयन किया गया, जिससे चयनित गांवों की कुल संख्या 28,783 हो गई।आरटीआई जवाब के मुताबिक 2025-26 में चुने गए गांवों की सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल से रही, जहां 8,044 गांवों का चयन किया गया। इसके बाद बिहार में 2,884 और उत्तर प्रदेश में 2,093 गांवों का चयन हुआ। मध्य प्रदेश में 755, राजस्थान में 547, ओडिशा में 497, पंजाब में 470 और कर्नाटक में 463 गांवों का चयन किया गया।
विभाग ने बताया कि 2022-23 में 3,330 गांवों, 2023-24 में 2,297 गांवों, 2024-25 में 4,539 गांवों और 2025-26 में 3,293 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया। इस तरह, इन चार वित्तीय वर्षों में कुल 13,459 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया। आरटीआई जवाब के मुताबिक वर्ष 2025-26 में, कर्नाटक में सबसे अधिक 792 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया। इसके बाद ओडिशा में 459, उत्तर प्रदेश में 446, आंध्र प्रदेश में 340 और मध्य प्रदेश में 255 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया।
चुने गए गांवों के विकास का आकलन 10 क्षेत्रों से जुड़े 50 निगरानी योग्य संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इन क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण सड़कें और आवास, बिजली और स्वच्छ ईंधन, कृषि, वित्तीय समावेशन, डिजिटलीकरण, तथा आजीविका और कौशल विकास शामिल हैं। आरटीआई के जवाब में ‘आदर्श ग्राम’ घटक के तहत जारी की गई धनराशि का साल-दर-साल विवरण भी दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में 51.62 करोड़ रुपये, 2023-24 में 236.3 करोड़ रुपये, 2024-25 में 326.1 करोड़ रुपये और 2025-26 में 303.2 करोड़ रुपये आवंटित किये गए। इस तरह, चार वर्षों में कुल 917.22 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई।


