‘प्रणाम उदंत मार्तंड’ में गूंजी ‘हिंदुस्तानियों के हित’ की हुंकार

Archana Ekka
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भोपाल : ‘उदंत मार्तंड’ के 200 साल पूरे होने को यादगार बनाने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकार और एवं संचार विश्वविद्यालय और वीर भारत न्यास के तत्वावधान में तीन दिवसीय समारोह ‘प्रणाम उदंत मार्तंड’ का शुभारंभ भोपाल के भारत भवन में हुआ। इस मौके पर अयोध्या के हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनीशरण ने कहा कि दो शताब्दी पहले एक मनीषी ने एक चिंता व्यक्त की और उसका प्रतीक है उदंत मार्तण्ड। उनके मन में आया कि हमारे संवाद बाहरी भाषा में क्यों हो, मातृभाषा में क्यों नहीं? अपनी भाषा और उससे बनते संवाद में पंडित युगलकिशोर शुक्ल ने ‘हिंदुस्तानियों के हित के हेत’ के रूप में पत्रकारिता को पहचाना था।

उन्होंने ‘उदंत मार्तण्ड’ शीर्षक को स्पष्ट करते हुए बताया कि ‘उदंत’ यानी समाचार और ‘मार्तंड’ यानी सूर्य। जैसे सूर्योदय बिना सोए लोग नहीं जागते, वैसे ही यह हिंदी का पहला पत्र समाज को जगाने के लिए ‘अखंड भारत’ के भाव से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि पत्रकार कोई भविष्यवक्ता या केवल पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर नहीं है, बल्कि वह समाज का ‘निष्प्रह और तत्वज्ञ वैद्य’ है, जो समाज की नाड़ी पहचानता है। नैरेटिव की शक्ति पर आचार्य ने कहा कि शुक्ल जी ने पहली ही पंक्ति में “हिंदुस्तानियों के हित के हित” लिखकर सदियों के लिए पत्रकारिता का नैरेटिव तय कर दिया था। आचार्य जी ने कहा कि पत्रकारिता समाज की सेवा में नियुक्त व्यवस्था है। पत्रकारिता सत्ता या विपक्ष का झंडा उठाने के लिए नहीं है। पत्रकारिता का दायित्व सत्व की रक्षा करना और उसे ही व्यक्त करना है।

वहीं, कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के इस प्रसंग पर हम पंडित युगलकिशोर शुक्ल और हिंदी पत्रकारिता को याद करेंगे। आज की भाषा में जिसे नैरेटिव सेट करना कहते हैं उस दृष्टि से पंडित युगलकिशोर शुक्ल ने आज से 200 वर्ष पहले ही पत्रकारिता का नैरेटिव सेट कर दिया था- “हिंदुस्तानियों के हित के हेत”। यह ध्येय वाक्य बताता है कि समाचारपत्र क्यों प्रकाशित होने चाहिए। कुलगुरु ने आधुनिक तकनीक और पत्रकारिता के सामने मौजूद खतरों पर गंभीर बात की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक को ‘स्वर्ण मृग’ (मायावी सोने का हिरण) बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्र इस मायावी जाल में फँसे, तो वे त्रेता युग में नहीं हैं जहाँ सुखांत होगा बल्कि कलयुग में है जहां एक गलती से ‘वनवास’ में 14 साल कोर्ट-कचहरी और मानहानि के चक्करों में बीत जाएँगे।

कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान ध्रुवीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले पत्रकारिता एक ‘मिशन’ थी। आज के दौर में पत्रकार को लेफ्ट या राइट की विचारधारा से ऊपर उठकर ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) के सिद्धांत पर सत्य को प्रदर्शित करना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि भारत 2037 तक आर्थिक, व्यापारिक और सामरिक रूप से श्रेष्ठ हो जाएगा लेकिन क्या भारत सांस्कृतिक रूप से वहां होगा, जहां उसे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को ‘राष्ट्र पहले’ के आधार पर अपनी पत्रकारिता करनी चाहिए।
राम कार्य की दृष्टि से हिंदी की सेवा करें : इसी तरह लेखक एवं प्राध्यापक डॉ. सी. जयशंकर बाबू ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्ष की यात्रा में, दक्षिण भारत में हिंदी पत्रकारिता के 130 वर्ष की साझेदारी है। हिंदी पत्रकारिता का शुभारंभ गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र से हुआ है। इसी प्रकार, भारतीय हिंदी साहित्य का शुभारंभ दक्षिण भारत से हुआ है।

इतिहास के पुनर्लेखन में यह बात प्रमुखता से दर्ज होनी चाहिए। तमिल के पत्रकार सुब्रमण्यम भारती ने 1906 में तमिल समाचार पत्र में हिंदी के समाचारों को शामिल किया। दक्षिण में हिंदी की चेतना को देखना है तब आपको 18वीं सदी के केरल के श्रीराम वर्मा का नाम याद रखना होगा। राम कार्य को करने की जो दृष्टि चाहिए, उसी चेतना के साथ दक्षिण भारत में हिंदी की सेवा की जाती है। कहा जाता है कि तमिलनाडु में हिंदी का विरोध है लेकिन कोई यह नहीं बताता कि 1950 के दशक में तमिलनाडु सरकार का हिंदी का समाचार पत्र प्रकाशित होता था। समाचार पत्रों के नाम भी दक्षिणी भाषा और हिंदी के आपसी मेलजोल का संकेत देते हैं। हिंदी वाणी, भारत वाणी और हिंदी मिलाप जैसे समाचार पत्र आज भी प्रकाशित हो रहे हैं।

 

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।