डॉ प्रणव रॉय ने दिखा दिया है कि पत्रकार को सब कुछ हासिल करने के बाद भी अपनी जमीन नहीं छोड़नी चाहिए

NDTV के संस्थापक Prannoy Roy के ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल पत्रकारिता के प्रति समर्पण से यह संदेश मिलता है कि सच्चा पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता हमेशा सक्रिय रहता है।

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दयानंद राय

एनडीटीवी और उसके जनक डॉ प्रणव रॉय को लेकर मेरे मन में सम्मान कल भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा। सम्मान इसलिए कि पत्रकारिता में अविस्मरणीय ऊंचाई हासिल करने के बाद भी उनके पैर जमीन पर हैं। बतौर पत्रकार वे अपनी जड़ों से जुड़े हैं और ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं। प्रणव रॉय 76 साल के हो चुके हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें पैसों की कमी है और वे मजबूरी में ऐसा कर रहे हैं। ऐसा वे अपने भीतर के पत्रकार को जीवित रखने के लिए कर रहे हैं और पूरी तत्परता से कर रहे हैं। एनडीटीवी से अलग होने के बाद वे अपने डिजिटल प्लेटफार्म डिकोडर के जरिये पत्रकारिता कर रहे हैं। 76 की उम्र के बावजूद उनका यह जज़्बा यह साबित करता है कि सच्चा पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता। वे न तो थके हैं और न ही पीछे हटे हैं, बल्कि बदलते दौर के साथ खुद को ढालते हुए डिजिटल पत्रकारिता में भी उतनी ही मजबूती से सक्रिय हैं।

डॉ. प्रणय रॉय का यह अंदाज़ उन्हें आज भी खास और प्रासंगिक बनाता है-एक ऐसे पत्रकार के रूप में, जो हर दौर में अपने काम और सोच से नई मिसाल कायम करता है। तो हम पत्रकारों को उनसे क्या सीखना चाहिए, उनसे ये सीखना चाहिए कि आप चाहे अतीत में जो रहे हों, लेकिन कभी अहं नहीं रखना चाहिए। पत्रकारिता की आधारभूमि ग्राउंड रिपोर्टिंग ही है और उससे हमेशा सरोकार बनाए रखना चाहिए। नयी शुरूआत करने की कोई उम्र या समय सीमा नहीं होती। उपलब्धियों के बाद भी सामान्य रहिए और बिना रुके बिना थके अपना काम करते रहिए।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।