प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर के ख़िलाफ़ गुजरात पुलिस की छापेमारी की ख़बर पर जताई चिंता

पत्रकार रवि नायर के दिल्ली और केरल आवास पर गुजरात पुलिस की छापेमारी से प्रेस क्लब चिंतित, पांच डिवाइस जब्त होने और हैश वैल्यू नहीं दिए जाने पर सवाल।

4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्ली : प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (पीसीआई) ने स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर के ख़िलाफ़ गुजरात पुलिस की छापेमारी की ख़बर पर चिंता जताई है। यह कार्रवाई 17 अगस्त को पत्रकार रवि नायर के दिल्ली और केरल स्थित आवास पर की गई। पीसीआई ने कहा कि पुलिस ने पांच डिवाइस ज़ब्त किए हैं। इनमें नायर के बेटे और उनके सहयोगी साची हेगड़े के कुछ डिवाइस भी शामिल हैं, जो उस समय उनके घर पर मौजूद थे। किसी भी डिवाइस के लिए हैश वैल्यू उपलब्ध नहीं कराई गई। यह बेहद चिंताजनक है। हैश वैल्यू के बिना यह पता लगाना संभव नहीं है कि ज़ब्ती के बाद किसी डिवाइस के साथ छेड़छाड़ की गई है या नहीं।”

पीसीआई ने कहा है कि नायर के बेटे और हेगड़े का इस मामले या उस पोस्ट से कोई संबंध नहीं था, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में उनके डिवाइस भी ज़ब्त किया जाना अस्वीकार्य है। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, यह मामला अक्तूबर 2025 में नायर की ओर से सोशल मीडिया एक्स पर किए गए एक पोस्ट से जुड़ा है। यह पोस्ट उस ख़बर के बारे में थी, जिसे उन्होंने ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ में सह-लेखक के तौर पर लिखा था। ख़बर में दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने एलआईसी को अडानी समूह में 3.9 अरब डॉलर तक निवेश करने का निर्देश दिया था।

पीसीआई ने कहा कि यह भी उल्लेखनीय है कि अडानी समूह के एक कर्मचारी की ओर से दर्ज कराई गई एफ़आईआर में ख़बर के फ़र्ज़ी होने का आरोप लगाया गया है। एफ़आईआर में केवल नायर का नाम है. इसमें उनके सह-लेखक या अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन का नाम नहीं है।” प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने कहा है कि एक स्वतंत्र पत्रकार को इस तरह निशाना बनाया जाना अस्वीकार्य है। उसने पुलिस और सरकारी एजेंसियों से ऐसे तरीके अपनाना बंद करने की अपील की है, जो उन मूल सिद्धांतों को कमज़ोर करते हैं, जिन पर स्वतंत्र भारत का निर्माण हुआ था।

डीआईजीआईपीयूबी न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन ने जताई चिंताडिजिटल मीडिया संगठनों की ओर से बनाए गए डीआईजीआईपीयूबी न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया है और इस पर चिंता जताई है। डीआईजीआईपीयूबी न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन ने कहा कि यह तलाशी अहमदाबाद की एक अदालत की ओर से जारी वारंट के आधार पर की गई। हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि अदालत ने ऐसी तलाशी का आदेश दिया और इसे किस तरीके से अंजाम दिया गया।” उसने कहा, “ऐसे हालात से प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के साथ समान व्यवहार के सिद्धांत को लेकर भी महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा होती हैं। संबंधित रिपोर्टिंग ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित एक जांच पर आधारित थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस रिपोर्टिंग से जुड़े भारतीय पत्रकार के ख़िलाफ़ ही यह कार्रवाई क्यों की गई।” डीआईजीआईपीयूबी ने मांग की है कि इस मामले में जो अभियुक्त नहीं हैं उनके डिवाइस फ़ौरन लौटाए जाएं और हर डिवाइस की ज़ब्ती का स्पष्ट क़ानूनी आधार बताया जाए और डिजिटल सबूतों से जुड़े सुरक्षा उपायों का सख़्ती से पालन किया जाए।

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।