लोकसभा में राहुल गांधी का हमला- स्मार्ट सिटी मिशन मोदी सरकार की कार्यशैली का उदाहरण, घोषणाएं बड़ी पर जवाबदेही शून्य

लोकसभा में राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी मिशन पर मोदी सरकार पर हमला बोला। योजना के वास्तविक परिणामों को लेकर सवाल उठाए, दावा किया कि मिशन सिर्फ प्रचार और घोषणाओं तक सीमित।

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नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बड़ी घोषणाएं करना और फिर बिना किसी जवाबदेही के बढ़चढ़कर इसका प्रचार करना मोदी सरकार की कार्यशैली है। स्मार्ट सिटी मिशन इसी शैली का एक उदाहरण है। उन्होंने लोकसभा में 19 मार्च को उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न और सरकार के उत्तर का हवाला देते हुए यह दावा भी किया कि स्मार्ट सिटी मिशन धोखे के अलावा कुछ भी नहीं है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा कि कोई शहर ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा – साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा नहीं दे पाता। आपको मोदी सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन तो याद ही होगा, जिसके तारीफों के पुल बांधते प्रधानमंत्री थकते नहीं थे। अब जब यह योजना अपने समापन की ओर है तो मैंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा। जो सच सामने आया उसे धोखे के अलावा कुछ और कह ही नहीं सकते।

इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना ही नहीं था। रायबरेली से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश को एक आधी-अधूरी योजना को पूरे बदलाव की कहानी बनाकर बेचा गया। सवाल पूछे कि कैसे होते हैं स्मार्ट सिटी, सफलता किस आधार पर तय हुई, कितने शहर सच में बदले, लोगों के जीवन में क्या ठोस बदलाव आया? तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सिर्फ बताया गया की करीब 48,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट “पूरे” बता दिए, लेकिन अगर सब पूरा है, तो आपके शहर में क्या बदला? राहुल गांधी ने दावा किया कि जमीनी हकीकत अलग कहानी कहती है- दूषित पानी और खुले सीवर से मौतें हो रही हैं, गिरते पुल व धंसती सड़कें इस विफलता को और उजागर कर रही हैं। यह योजना मोदी सरकार की असली कार्यशैली का उदाहरण है- घोषणाएं बड़ी, प्रचार उससे बड़ा, और जवाबदेही शून्य। आप अपने शहर को सूची में खोजिए और खुद तय कीजिए कि क्या यह वही “स्मार्ट सिटी” है, जिसका सपना आपको बेचा गया था?

राहुल गांधी के प्रश्नों के उत्तर में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा था कि स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) के तहत, केंद्र सरकार के 48,000 करोड़ रुपये के आवंटन में से, मिशन के तहत चयन किए गए 100 शहर 47,458 करोड़ रुपये (शहरों के लिए कुल केंद्रीय आवंटन का 99 प्रतिशत हिस्सा) की केंद्रीय वित्तीय सहायता का दावा कर चुके हैं। एक मार्च, 2026 तक, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, 46,326 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया जा चुका है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।