आचार-विचार और संस्कार का महाकाव्य है रामचरितमानस : डॉ जंग बहादुर पांडेय

आरा में रामचरितमानस प्रचार मंडल के 64वें वार्षिकोत्सव में प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने कहा कि रामचरितमानस आचार, विचार और संस्कार का महाकाव्य है, हनुमानजी की भूमिका अतुलनीय है।

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आरा : श्रीराम चरित मानस प्रचार मंडल, शाहाबाद के 64 वें वार्षिकोत्सव के तीन दिवसीय समारोह के प्रथम दिन शनिवार को उद्घाटन परम पूज्य संत श्री श्री 1008 श्री माध्वाचार्य श्रीजीयर महाराज मठाधीश तोताद्रिमठ बिहटा की ओर से किया गया। इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष और हिंदी रत्न से विभूषित प्रोफेसर जंगबहादुर पाण्डेय ने रामकथा के माध्यम से श्री राम एवं उनके भक्त भगवान हनुमान के बारे में कहा कि रामचरितमानस में हनुमानजी की भूमिका अतुलनीय है। हनुमान जी श्रीराम प्रभु की सभी समस्याओं का समाधान सहजता के साथ कर दिया करते थे।हनुमान जी ने अपनी सेवा से प्रभु श्रीराम को अपने बस में कर लिया था।

सुमिरी पवन सुत पावन नामू।
अपने बस करी राखे रामू।

अहर्निश मर्मान्वेषी स्वभाव के प्रो.जे.बी.पाण्डेय ने रामचरितमानस के सुंदरकांड तथा अयोध्या काण्ड के अनेक चौपाइयों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि श्री हनुमान जी विश्व के पहले अनुसंधानकर्ता रहे हैं। रामचरित मानस आचार, विचार और संस्कार का महाकाव्य है-सबको इसे पढना चाहिए।इस अवसर पर शाहाबाद बुद्धिजीवी मंच के संचालक सह प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि इस सात्विक समारोह के आयोजक सनातन धर्म के संवाहकों को सम्मानित करने के अतिरिक्त सनातन धर्म के मूल्यों के प्रचार- प्रसार के लिए संकल्पित हैं, निसंदेह साधुवाद के पात्र हैं। ईश्वर इस कार्यक्रम के आयोजकों के उद्देश्यों को पूर्ण करें,आयोजक मंडल अहर्निश जिजीविषा एवं जीवटता के साथ बेबाक एवं बेलौस ढंग से सदैव जाज्वल्यमान रहें। डा प्रसाद ने कहा कि सभी समस्याओं के समाधान का नाम हनुमान है।

श्रीराम के कार्यों को बिना विश्राम किए सभी समस्याओं का समाधान करने में सफल रहे हैं। ऐसे भगवान हनुमान की पूजा हर घर होनी चाहिए।इस पावन अवसर पर मानस मर्मज्ञ स्वामी ऋतेश जी महाराज, अरुणानंदजी, उमेश चन्द्र ओझा ,मानस कोकिला सुमित्रा प्रभृति वक्ताओं ने अपने सार गर्भित उद्बोधनों से संगोष्ठी में चार चाद लगाया।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत अध्यक्ष सूर्यदयाल राय ने तथा कुशल संचालन विद्यानंद सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन अरुण कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम का स्वति वाचन से उद्घाटन और शांति पाठ से समापन हुआ।

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