रामेश्वर उरांव ने झारखंड स्थापना दिवस की राज्यवासियों को दी शुभकामनाएं

News Aroma Media
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न्यूज़ अरोमा रांची: अलग झारखंड राज्य स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने राज्यवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है।

उरांव ने रविवार को अपने बधाई संदेश में कहा कि कोरोना संक्रमण काल में झारखंड राज्य भले ही अपना स्थापना दिवस सादगीपूर्वक मना रहा है, लेकिन उत्साह में कमी कोई नहीं आयी है। उन्होंने कहा कि अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा ने झारखंड के विकास का जो सपना देखा था, उसे राज्य सरकार पूरा करने में जुटी है।

उरांव ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा भी ऐसे ही एक युगांतरकारी शख्सियत थे, जिन्होंने आदिवासी जनजीवन के मसीहा के रूप में केवल 25 सालों में बिहार, झारखंड और ओडिशा में जननायक की पहचान बनाई।

आज भी आदिवासी जनता बिरसा मुंडा को भगवान की तरह याद करती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने आदिवासी जनजीवन अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के लिये लम्बा एवं कड़ा संघर्ष किया। वे महान् धर्मनायक थे, तो प्रभावी समाज-सुधारक थे। वे राष्ट्रनायक थे तो जन-जन की आस्था के केन्द्र भी थे।

सामाजिक न्याय, आदिवासी संस्कृति एवं राष्ट्रीय आन्दोलन में उनके अनूठे एवं विलक्षण योगदान के लिये न केवल आदिवासी जनजीवन बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति सदा उनकी ऋणी रहेगी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष अट्ठारहवीं शताब्दी से आज तक चला आ रहा है। 1766 के पहाड़िया-विद्रोह से लेकर 1857 के गदर के बाद भी आदिवासी संघर्षरत रहे। सन् 1895 से 1900 तक बिरसा मुंडा का महाविद्रोह ‘ऊलगुलान’ चला। आदिवासियों को लगातार जल-जंगल-जमीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल किया जाता रहा और वे इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे।

1895 में बिरसा ने अंग्रेजों की लागू की गयी जमींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ जंगल-जमीन की लड़ाई छेड़ी थी। उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ भी जंग का ऐलान किया। ये महाजन, जिन्हें वे दिकू कहते थे, कर्ज के बदले उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते थे। यह मात्र विद्रोह नहीं था, बल्कि यह आदिवासी अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने के लिए महासंग्राम था। उन्होंने कहा कि अमर शहीद बिरसा मुंडा के दिखाये रास्ते पर चलकर ही झारखंड का सर्वांगीण विकास हो सकता है।

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