
रांची: प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सोमवार को देव स्नान यात्रा का आयोजन होगा। दोपहर 1 बजे स्नान यात्रा की पूजा शुरू होगी, जो 1:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद 1:50 बजे भगवान की आरती होगी और दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक श्रद्धालु भगवान का जलाभिषेक कर सकेंगे। जलाभिषेक के बाद 108 मंगल आरती, जगन्नाथ अष्टकम और गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा। शाम 4 बजे से भगवान 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाएंगे। इस दौरान उन्हें बीमार माना जाता है, इसलिए उनके दर्शन बंद रहेंगे। अगले 15 दिनों तक मंदिर में केवल राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के दर्शन होंगे। 15 जुलाई को भगवान एकांतवास से बाहर आएंगे। इसके बाद नेत्रदान की रस्म होगी और अगले दिन भगवान रथ पर सवार होकर नौ दिनों के लिए मौसीबाड़ी प्रस्थान करेंगे। वहीं 25 जुलाई को भगवान की मुख्य मंदिर में वापसी होगी।
स्नान यात्रा के लिए मंगाए गए 53 घड़े
देव स्नान यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस विशेष अनुष्ठान के लिए 53 घड़े मंगाए गए हैं। इसके अलावा अश्वगंधा, मधु, हल्दी, इत्र, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री भी लाई गई है। इन्हें मिलाकर भगवान का पवित्र स्नान कराया जाएगा। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर बहन सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भक्तों द्वारा भगवान को अधिक स्नान कराने के कारण वे अस्वस्थ हो जाते हैं और 15 दिनों के लिए गरुड़ मंदिर में एकांतवास करते हैं।
इधर रथ यात्रा को लेकर रथ निर्माण का काम भी जारी है। इस दौरान भगवान का पंचगव्य-दूध, शहद, इत्र, घी और गंगाजल से महाभिषेक होगा। इसके बाद महाआरती, भगवान जगन्नाथ की कथा और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। सनातन परंपरा और पुरी की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा महोत्सव की शुरुआत स्नान पूर्णिमा से ही मानी जाती है।

