
Fake ST Certificate : रिम्स में सोमवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। रिम्स प्रबंधन ने जहां एक तरफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर एडमिशन लेने वाले एक मेडिकल छात्र का नामांकन रद्द कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के स्वास्थ्य सचिव की मौजूदगी में अस्पताल की सूरत बदलने को लेकर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं।
इतना ही नहीं रिम्स ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के होनहार बच्चों के लिए अपने महत्वाकांक्षी फ्री NEET-UG कोचिंग प्रोग्राम के नतीजों की भी घोषणा कर दी है।
साहेबगंज के छात्र का MBBS नामांकन रद्द
रिम्स प्रबंधन ने पारदर्शिता और नियमों का पालन करते हुए सत्र 2025 बैच के एमबीबीएस (MBBS) छात्र आशीष कुमार (पिता- मंटू प्रसाद मंडल) का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
मिली शिकायत के बाद रिम्स प्रशासन ने छात्र के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र की सत्यता जांचने के लिए उपायुक्त साहेबगंज को पत्र भेजा था। जिला प्रशासन की जांच में यह प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाया गया। रिपोर्ट मिलते ही संस्थान ने कार्रवाई की। रिम्स प्रबंधन ने साफ किया है कि दस्तावेजों में हेरफेर को लेकर प्रबंधन ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम करता रहेगा।
पलामू के मरीजों का हाल जानने पहुंचे वित्त मंत्री
पलामू जिले के एक ही परिवार के बीमार सदस्यों को रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनका हालचाल जानने और इलाज की समीक्षा करने खुद झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर रिम्स पहुंचे। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के निदेशक दिनेश यादव भी मौजूद रहे। शुरुआती चिकित्सकीय आकलन में डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि यह मामला एपिडेमिक ड्रॉप्सी का हो सकता है, जो आमतौर पर दूषित या मिलावटी सरसों तेल के इस्तेमाल से होता है।
हालांकि सटीक कारणों का पता लगाने के लिए फोरेंसिक और फूड सैंपल्स लैब भेजे गए हैं। घटना में मृत परिजनों के शवों की वैज्ञानिक जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन कर पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया गया है। वित्त मंत्री ने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर देश के अन्य बड़े अस्पतालों से टेली-कंसल्टेशन लें या मरीजों को बाहर रेफर करें।
रिम्स का बदलेगा नक्शा, बनेगा नया OPD और FMT ब्लॉक
ट्रॉमा सेंटर के निरीक्षण के बाद अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में रिम्स परिसर के पुनर्विकास को लेकर दो अलग-अलग उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। जिसमें रिम्स की जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए पुराने बीएसएनएल कार्यालय भवन, सीनियर रेजिडेंट (SR) क्वार्टर और फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (FMT) विभाग के पुराने हो चुके भवनों को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जाएगा।
एफएमटी विभाग की जगह पर एक अत्याधुनिक नया भवन खड़ा किया जाएगा ताकि रिसर्च और मेडिकल पढ़ाई को बढ़ावा मिले। इसके अलावा मरीजों की भारी भीड़ को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक नए विस्तारित ओपीडी (OPD) भवन के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।
न्यूरोसर्जरी विभाग का विस्तार होगा, बेड्स की संख्या बढ़ेगी और रैन बसेरा परिसर में भी नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए मजबूत बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी।अस्पताल को पूरी तरह तकनीक से लैस करने के लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) को मजबूत किया जा रहा है। अब रिम्स में डॉक्टरों को टैबलेट आधारित डिजिटल कार्यप्रणाली से जोड़ा जाएगा।
मरीजों को डिजिटल डिस्चार्ज समरी मिलेगी, उनके रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेंगे और पूरे परिसर की सुरक्षा की निगरानी हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों से होगी। बेड और ऑपरेशन थिएटर (OT) के बेहतर मैनेजमेंट के लिए भी सीडैक (C-DAC) और बीएसएनएल के अधिकारियों के साथ मिलकर योजना तैयार की गई है।
फ्री नीट कोचिंग के लिए 30 मेधावी छात्र चयनित
रिम्स की एक सराहनीय सामाजिक पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के होनहार छात्रों को डॉक्टर बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए नि:शुल्क NEET-UG कोचिंग कार्यक्रम के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद 30 सफल विद्यार्थियों की लिस्ट जारी कर दी गई है। यह सूची रिम्स की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। सभी चयनित छात्र-छात्राओं को 3 जुलाई 2026 को अपने मूल दस्तावेजों के साथ रिम्स बुलाया गया है, जिसके बाद उनकी कक्षाएं विधिवत शुरू हो जाएंगी।

