
रांची : रांची का चर्चित मारवाड़ी कॉलेज अब अकादमिक सत्र 2026-27 से ऑटोनॉमस व्यवस्था से बाहर हो जाएगा। करीब 17 साल तक स्वायत्त संस्थान के रूप में पहचान बनाने के बाद अब कॉलेज दोबारा रांची यूनिवर्सिटी की पारंपरिक व्यवस्था के तहत संचालित होगा। इस फैसले का असर कॉलेज में पढ़ रहे 15 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं पर पड़ सकता है। ऑटोनॉमी खत्म होने के बाद परीक्षा, रिजल्ट, सिलेबस, मूल्यांकन प्रणाली और पूरे शैक्षणिक कैलेंडर का नियंत्रण फिर से रांची यूनिवर्सिटी के पास चला जाएगा। यानी कॉलेज अब अपने स्तर पर परीक्षा आयोजित करने, समय पर रिजल्ट जारी करने या सिलेबस में बदलाव जैसे फैसले नहीं ले सकेगा। यही वजह है कि छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है। दरअसल, रांची यूनिवर्सिटी में पहले भी परीक्षा में देरी, रिजल्ट अटकने और सत्र नियमित नहीं रहने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में छात्रों को डर है कि कहीं एक बार फिर वही स्थिति न बन जाए।
2009 में मिला था ऑटोनॉमस स्टेटस
मारवाड़ी कॉलेज को साल 2009 में यूजीसी की ओर से ऑटोनॉमस स्टेटस मिला था। इसके बाद कॉलेज ने अपनी अलग परीक्षा प्रणाली लागू की थी। समय-समय पर सिलेबस अपडेट किए गए और कई प्रोफेशनल व जॉब ओरिएंटेड कोर्स भी शुरू किए गए। समय पर परीक्षा और जल्दी रिजल्ट जारी करने की वजह से कॉलेज ने झारखंड में अपनी अलग शैक्षणिक पहचान बनाई थी। यही कारण था कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र यहां एडमिशन लेने पहुंचते थे।
पहले भी खत्म हुई थी ऑटोनॉमी
यह पहली बार नहीं है जब कॉलेज की ऑटोनॉमी खत्म हो रही है। इससे पहले साल 2021 में भी स्वायत्त दर्जा समाप्त हुआ था। उस समय परीक्षा और रिजल्ट की पूरी प्रक्रिया रांची यूनिवर्सिटी के अधीन चली गई थी, जिसका असर सीधे शैक्षणिक सत्र पर पड़ा था। कई छात्रों का रिजल्ट देर से आया और पूरा सत्र पीछे खिसक गया था। बाद में जब कॉलेज को दोबारा ऑटोनॉमी मिली, तब प्रबंधन ने परीक्षा कैलेंडर को व्यवस्थित करने और सत्र नियमित रखने पर खास फोकस किया था।
छात्रों की बढ़ी टेंशन
अब एक बार फिर ऑटोनॉमी खत्म होने की खबर के बाद छात्रों के बीच चर्चा तेज हो गई है। छात्रों को डर है कि परीक्षा और रिजल्ट में फिर से देरी शुरू हो सकती है। खासकर वे छात्र ज्यादा परेशान हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं, प्लेसमेंट या आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। अभिभावकों का भी कहना है कि अगर सत्र समय पर नहीं चला तो इसका सीधा असर छात्रों के करियर पर पड़ेगा। फिलहाल सभी की नजर कॉलेज प्रबंधन और रांची यूनिवर्सिटी की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।

