निगम अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों को भविष्य में खाली छोड़ने के बजाय शहरवासियों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इनका इस्तेमाल पार्क, लाइब्रेरी, सार्वजनिक सुविधाओं, आश्रय गृह, वेंडिंग जोन और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं के लिए किया जा सकता है।
इन इलाकों में जमीन हुई अतिक्रमण मुक्त
निगम की कार्रवाई में एदलहातू की करीब 4.8 एकड़, कुसुम बिहार की 78.65 डिसमिल, करमटोली तालाब की 51 डिसमिल, ग्वाला टोली डोरंडा की लगभग 1.20 एकड़ और उर्दू स्कूल थड़पखना की 31.5 डिसमिल जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया है।
इसके अलावा बड़ा घाघरा में 2.80 एकड़, मानिटोला में करीब 5 एकड़, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक में 11 डिसमिल, डोरंडा बाजार में लगभग 1 एकड़ और बूटी मोड़ चौक में 0.44 एकड़ जमीन के संरक्षण की कार्रवाई की गई है।
निगम की परिसंपत्तियों की भी हो रही सुरक्षा
सिर्फ खाली भूखंड ही नहीं, बल्कि निगम की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों को भी सुरक्षित किया जा रहा है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री ऑफिस, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
वहीं धुर्वा, जगन्नाथपुर और खादगढ़ा स्थित आश्रय गृह की जमीन को भी सुरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।
वेंडिंग जोन और लेबर चौक की योजना
अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीनों के इस्तेमाल को लेकर निगम ने कई योजनाएं तैयार की हैं। मोरहाबादी, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का प्रस्ताव है, ताकि फुटपाथ और सड़क किनारे होने वाली अव्यवस्थित दुकानदारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सके।
इसके साथ ही डोरंडा बाजार और लोआडीह में दैनिक मजदूरों के लिए लेबर चौक विकसित करने की दिशा में भी काम किया गया है।
भविष्य में मिलेंगी कई जनसुविधाएं
नगर निगम का फोकस अब इन जमीनों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनका बेहतर उपयोग करने पर है। भविष्य में यहां पार्क, पुस्तकालय, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं, स्वच्छता केंद्र और कचरा प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।
निगम के मुताबिक, जमीन और परिसंपत्तियों का स्पष्ट रिकॉर्ड एवं स्वामित्व तय होने से नगर निगम की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हो सकती है। आगे चलकर इन्हीं परिसंपत्तियों के आधार पर PPP मॉडल और Municipal Bonds जैसी व्यवस्थाओं के जरिए शहर में विकास परियोजनाओं को गति देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

