

पटना : राजकमल प्रकाशन समूह की ओर से पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में किताब उत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर राजकमल की ओर से प्रकाशित चार पुस्तकों मन मोहन पाठक की गगन घटा घहरानी, सतीनाथ भादुडी की ढोडाय चरित मानस, हिमांशु श्रीवास्तव की -नदी फिर बह चली और चंद्र किशोर जायसवाल की पलटनिया का लोकार्पण हृषिकेश सुलभ, संतोष दीक्षित, रणेंद्र और पुष्प मित्र के कर कमलों से हुआ। इस मौके पर मंचस्थ अतिथियों की ओर से इन पुस्तकों पर समीक्षाएं भी प्रस्तुत की गई।





इस अवसर पर डा वज्रांग प्रताप केशरी की दो पुस्तकों – चरित काव्य और रामचरित मानस एवं मानस अलंकार मंदाकिनी का भी लोकार्पण डॉ जंग बहादुर पाण्डेय, डॉ देवेन्द्र प्रसाद सिंह और डॉ राजेंद्र प्रसाद के कर कमलों से किया गया, जिसका करतल ध्वनि से दर्शकों ने स्वागत किया। पुस्तकों पर चर्चा करते हुए डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि चरित काव्य और रामचरित मानस डा केशरी के शोध प्रबंध का यत् किंचित् परिवर्तित रूप है और मानस अलंकार मंदाकिनी एक अलंकार ग्रंथ है, जिसमें सभी अलंकारों के उदाहरण मानस से दिये गये हैं। डा केशरी की दोनो पुस्तकें भाषा, विचार एवं शिल्प तीनों दृष्टियों से वैभवपूर्ण हैं। डा केशरी एतदर्थ थोक भाव से बधाई के पात्र हैं। द्वितीय सत्र में नवोदित कवियों का कविता पाठ हुआ।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत सत्यानंद निरूपम ने, संचालन धर्मेंद्र सुशांत ने और धन्यवाद ज्ञापन अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने किया।
