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डोरस्टेप सर्विस के जरिए होगा श्रमिकों का पंजीयन

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने निर्माण मजदूरों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। गुरुवार 19 नवंबर से निर्माण मजदूरों को पंजीयन और नवीकरण के लिए किसी सरकारी आफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं। अब 1076 पर फोन करके दिल्ली सरकार की डोरस्टेप सर्विस के जरिए घर बैठे उनका सारा काम हो जाएगा।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे दिल्ली में सुशासन का अनोखा प्रयोग बताते कहा, कंस्ट्रक्शन कंपनियों से निर्माण श्रमिक कल्याण सेस मिलता है।

निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से इस राशि का उपयोग निर्माण श्रमिकों की भलाई के लिए होता है। इसके लिए बोर्ड में इन श्रमिकों का पंजीयन जरूरी है।

सिसोदिया ने कहा, पिछले दिनों जिला श्रम कार्यालयों के दौरे में मजदूरों को लाइनों में परेशान देखने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। पंजीयन और नवीकरण की प्रक्रिया में जटिलता के कारण बिचौलियों द्वारा मजदूरों का फॉर्म भरने के नाम पर एक से दो हजार रूपयों तक की अवैध वसूली की जाती थी।

निर्माण मजदूरों को कई दिनों तक लेबर आफिस जाकर घंटों लाइन में लगना पड़ता था। इससे उनकी दैनिक मजदूरी का भी नुकसान होता था। आवेदन के बाद वेरिफिकेशन के लिए भी लेबर आफिस जाना पड़ता था।

इसके कारण उन्हें अपने काम से छुट्टी लेनी पड़ती थी। निर्माण मजदूरों को इस परेशानी से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने डोरस्टेप डिलेवरी के जरिए इन मजदूरों के पंजीयन और नवीकरण की सुविधा प्रारंभ कर दी है।

सिसोदिया ने कहा, अब निर्माण मजदूरों को सिर्फ 1076 नंबर पर फोन करना होगा। दिल्ली सरकार की डोरस्टेप डिलेवरी टीम का सदस्य उस मजदूर के घर आकर उससे दस्तावेज लेकर फार्म भर देगा।

साथ ही उन दस्तावेजों और मजदूर की फोटो को ऑनलाइन अपलोड कर देगा। आवेदन को ऑनलाइन स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण मजदूर अपना प्रमाणपत्र इंटरनेट से डाउनलोड कर सकता है। अन्यथा चार पांच दिन में उसके घर भेज दिया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि, कानून के तहत कंस्ट्रक्शन लेबर की परिभाषा काफी व्यापक है। इसके तहत बेलदार, कुली, लेबर, राजमिस्त्री, मिस्त्री, मसाला बनाने वाले मजदूर, कंक्रीट मिक्सर, टाइल्स एवं स्टोन फीटर, चूना पोताई सफेदी वाले, पेंटर, पीओपी मजदूर भी आते हैं।

निर्माण स्थल पर कार्यरत चौकीदार, प्लंबर, कारपेंटर, बढ़ई, बिजली मिस्त्री, फीटर, लोहार, माली, शटरिंग मिस्त्री एवं लेबर, पंप आपरेटर, बार बाइंडर, क्रेन ऑपरेटर इत्यादि को भी कंस्ट्रक्शन लेबर की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए यह भ्रम खत्म करना जरूरी है कि कंस्ट्रक्शन लेबर सिर्फ वह नहीं है जो माथे पर ईंटें उठाकर चलता है।

दिल्ली सरकार ने इन मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं का ब्यौरा दिया। राज्य सरकार के मुताबिक पंजीकृत श्रमिकों को अपनी या बेटे, बेटी की शादी के लिए 35000 से 51000 तक की राशि मिलती है।

साथ ही, स्वास्थ्य के लिए 2000 से 10000 तक और मातृत्व लाभ के तौर पर 30000 की राशि और साठ साल के बाद मासिक तीन हजार रुपए पेंशन का प्रावधान है।

दुर्घटना में मृत्यु होने पर दो लाख रुपए, सामान्य मृत्यु होने पर एक लाख रुपए तथा अंतिम संस्कार के लिए दस हजार रुपए तथा विक्लांगता की स्थिति में एक लाख रुपए सहायता का प्रावधान है। साथ ही, श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए 500 से दस हजार रुपए तक मासिक छात्रवृति भी दी जाती है।

सरकार इन सभी श्रेणियों के श्रमिकों को सभी योजनाओं का लाभ देना चाहती है। लेकिन अब तक मात्र एक लाख ग्यारह हजार श्रमिकों का ही पंजीयन हुआ है, जबकि दिल्ली में लगभग दस लाख कंस्ट्रक्शन लेबर होने का अनुमान है।

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