रिम्स में 8 साल की बच्ची की दुर्लभ ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी की सर्जरी, 7 घंटे चला ऑपरेशन

रांची के RIMS में 8 साल की बच्ची की दुर्लभ ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी की सात घंटे लंबी रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सफल हुई। मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने ब्लैडर और पेट का पुनर्निर्माण किया।

Razi Ahmad
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रांची: रिम्स में डॉक्टरों की टीम ने एक 8 वर्षीय बच्ची को नई जिंदगी दी है। रिम्स में दुर्लभ जन्मजात बीमारी ‘ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी’ से पीड़ित बच्ची की रिफंक्शनल एंड रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह ऑपरेशन लगभग सात घंटे तक चला, जिसमें यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया विभाग की एक संयुक्त मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने हिस्सा लिया।

ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी एक बेहद दुर्लभ जन्मजात विकृति है, जिसमें मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) शरीर के भीतर सामान्य रूप से विकसित न होकर पेट के निचले हिस्से की दीवार से बाहर खुला रहता है। इसे ठीक करने के लिए ब्लैडर, एब्डोमिनल वॉल और पेल्विक स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण करना चिकित्सा के क्षेत्र में एक बेहद कठिन चुनौती माना जाता है।

इस ऐतिहासिक सर्जरी का नेतृत्व यूरोलॉजिस्ट डॉ. राणा प्रताप सिंह ने किया। टीम में पीडियाट्रिक सर्जरी के डॉ. श्याम सुंदर व डॉ. अभिषेक सिंह, ऑर्थोपेडिक्स के डॉ. विनय प्रभात व डॉ. अभिषेक और एनेस्थीसिया के डॉ. मुकेश व डॉ. सौरभ शामिल रहे। डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिए ब्लैडर और निचले पेट के हिस्से का रीकंस्ट्रक्शन कर उसे बंद किया।

ऑपरेशन के बाद बच्ची की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। वह अब यूरिनरी सेंसेशन महसूस कर पा रही है और उसका पेट का घाव पूरी तरह से ठीक हो चुका है। बच्ची को फिलहाल लॉन्ग-टर्म फॉलो-अप पर रखा गया है, जहां उसके मूत्राशय, किडनी के कामकाज और शारीरिक विकास की नियमित जांच की जाएगी।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।