रिम्स में ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं हो रहा डॉक्टरों का मोह

News Aroma
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

चुटका में दवा का नाम लिखकर दे रहे है डॉक्टर

विशेष कंपनी की दवा लाने को कहा जा रहा परिजनों को

छोटी मोटी दवाएं भी उपलब्ध नहीं है हॉस्पिटल के स्टोर में

रांची : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मरीजों को सस्ती और जरूरी दवाएं बिना किसी देरी के उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बावजूद ब्रांडेड दवाओं के इस्तेमाल का मामला सामने आ रहा है। परिजनों का आरोप है कि कुछ डॉक्टर मरीजों को कागज की पर्ची पर सीधे दवा का नाम लिखकर दे रहे हैं और परिजनों से विशेष कंपनी की दवा लाने को कहा जा रहा है। इससे गरीब मरीजों के परिजनों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इतना ही नहीं दूसरी कंपनी का दवा लाने पर लौटा दिया जा रहा है।

कमजोर वर्ग के मरीजों की संख्या अधिक

मरीजों के परिजनों का कहना है कि रिम्स में इलाज के लिए आने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में अस्पताल में उपलब्ध होने वाली दवाओं के बजाय बाहर से महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने की सलाह मिलने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। कई बार डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा किसी खास कंपनी के मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध होती है, जिसके लिए मरीज के परिजनों को अस्पताल से बाहर भटकना पड़ता है।

छोटी मोटी दवाएं भी स्टॉक में नहीं

दूसरी ओर रिम्स के स्टोर में छोटी-मोटी और सामान्य जरूरत की दवाओं की उपलब्धता भी पर्याप्त नहीं होने की शिकायत मिल रही है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई सामान्य दवाएं अस्पताल में नहीं मिलतीं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में बाहर की दुकानों से दवा खरीदनी पड़ती है। ऐसे में ब्रांडेड दवाओं की पर्ची और अस्पताल के स्टोर में दवाओं की कमी, दोनों हमारी परेशानी बढ़ा रहे हैं। परिजनों का ये भी कहना है कि जब रिम्स में सरकार की ओर से दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तो उन्हें बाहर से दवाएं खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

कागज की पर्ची में लिख रहे दवा का नाम

मरीजों और उनके परिजनों ने रिम्स प्रबंधन से मामले की जांच कराने, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने और डॉक्टरों द्वारा विशेष कंपनी की दवा लिखने की शिकायत पर उचित कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टर कार्रवाई से बचने के लिए दवाओं के नाम कागज की छोटी छोटी पर्चियों में लिखकर दे रहे हैं जिससे कि उनकी पहचान भी सामने न आने पाए। जबकि इनडोर में भर्ती मरीजों को हॉस्पिटल की पर्ची पर दवा, टेस्ट का नाम लिखकर देना है।

Share This Article