
रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अस्पताल परिसर की सुरक्षा के नाम पर सरकार ने 3.5 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन हकीकत यह है कि अस्पताल में लगे 1417 सीसीटीवी कैमरों में से करीब 1318 कैमरे पूरी तरह ठप पड़े हैं और महज 100 कैमरे ही काम कर रहे हैं। रिम्स प्रबंधन के दावों की पोल तब खुल गई जब इसकी जांच हुई। रिम्स परिसर, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी और बाउंड्रीवॉल पर कंटीले तारों समेत सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
सुरक्षा की मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक संसाधनों से लैस एक बड़ा कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसमें 16 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगी हैं। नियमों के मुताबिक यहां चौबीस घंटे नजर रखने के लिए चार ऑपरेटरों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन पड़ताल के दौरान वहां कोई भी ऑपरेटर मौजूद नहीं मिला। कंट्रोल रूम में केवल एक सुरक्षा गार्ड तैनात पाया गया।
13 जुलाई (दोपहर 12:36 बजे) 16 बड़ी स्क्रीनों पर सिर्फ 92 कैमरों के फुटेज लाइव दिख रहे थे। वहीं 18 जुलाई (शाम 5:00 बजे) स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, स्क्रीन पर केवल 107 कैमरों का डिस्प्ले चल रहा था। यानी कुल मिलाकर औसतन सिर्फ 100 कैमरे ही चालू हालत में मिले।
इस मामले पर रिम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने कहा कि अस्पताल में 1417 सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए जा चुके हैं। हाल ही में हुई थंडरिंग के कारण सिस्टम में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन जब वह खुद निदेशक के साथ औचक निरीक्षण पर गए थे, तब कंट्रोल रूम में एक ऑपरेटर मौजूद था।

