शेल्टर होम में काट रहे खटमल, चूहों ने मचा रखा है आतंक, नैचुरल कॉल आने पर जाना पड़ता है सुलभ शौचालय

रिम्स रांची के शेल्टर होम में मरीजों के परिजनों को बदहाल सुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। शौचालय के लिए हर बार 10 रुपये देने से लोग परेशान हैं।

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हर बार शौचालय का इस्तेमाल करने पर चुकाने पड़ते है प्रति व्यक्ति 10 रुपए

रिम्स कैंपस में मरीज और उनके परिजन ठहरते है आश्रय गृह में

रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए बनाया गया आश्रय गृह (शेल्टर होम) बदहाली की ओर बढ़ रहा है। दूर-दराज से आए लाचार मरीजों के परिजनों के लिए यह आश्रय गृह राहत के बजाय आफत का सबब बन चुका है। स्थिति यह है कि 20 बेड वाले इस शेल्टर होम में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे यहां ठहरने वाले लोग परेशान हैं। हालांकि मजबूरी में लोग इस शेल्टर होम में ठहर रहे है। चूंकि शेल्टर होम में रुकने का कोई चार्ज नहीं लिया जाता।

ठीक से नहीं सो पा रहे लोग

आश्रय गृह के बिस्तरों पर खटमलों ने डेरा डाल रखा है। खटमलों के काटने से लोगों का सोना दूभर हो जाता है। वहीं दूसरी ओर चूहों ने भी आतंक मचा रखा है। चूहे न सिर्फ लोगों के खाने-पीने के सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि गद्दे और तकिए भी कुतर रहे है। गंदगी और अव्यवस्था के कारण संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

20 बेड वाले शेल्टर होम में नहीं है बाथरूम का इंतजाम

इस 20 बेड के शेल्टर होम की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां ठहरने वाले लोगों के लिए बाथरूम (शौचालय) का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। नैचुरल कॉल (शौच या लघुशंका) आने पर परिजनों को मजबूरन बाहर स्थित सुलभ शौचालय का रुख करना पड़ता है। सुलभ शौचालय का हर बार इस्तेमाल करने पर प्रति व्यक्ति से 10 रुपये वसूले जाते हैं। रिम्स में इलाज कराने आने वाले अधिकांश लोग गरीब तबके से होते हैं। ऐसे में दिनभर में कई बार शौचालय जाने पर उन्हें अपनी जेब से एक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

ये दी जा रही सुविधाएं

शेल्टर होम में ठहरने के लिए लोगों को आधार कार्ड की कॉपी देना है। इसके बाद लोगों को बेड दिया जाता है। बेड के साथ लोगों को चादर, तकिया और मच्छरदानी भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरा भी निगरानी के लिए लगाया गया है। हालांकि हर दिन लोगों को साफ चादर नहीं मिल रही है। मजबूरी में लोग उसी से काम चला रहे हैं।

क्या कहती है संचालक

शेल्टर होम की देखरेख करने वाली रोशन स्वयं सहायता समूह की सीमा देवी ने बताया कि क्या हम लोग आधार कार्ड लेकर लोगों को बेड उपलब्ध करा देते है। बिजली पानी तो यहां पर है। चूहा बहुत नुकसान कर रहे हैं। बेड में भी खटमल हो गए हैं। इसकी जानकारी अधिकारियों को दे दी गई है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।