

नई दिल्ली : भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को लेकर इंजन के मोर्चे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ब्रिटेन की विमान इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत को इंजन की पूरी तकनीक देने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत इंजन से जुड़ी बौद्धिक संपदा के अधिकार (आईपीआर) भी भारत के पास रहने की बात कही गई है। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित तकनीक अमेरिकी आईटीएआर पाबंदियों से मुक्त होगी। लड़ाकू विमान का इंजन केवल विमान को उड़ाने वाला हिस्सा नहीं होता। उसकी ताकत, तापमान सहने की क्षमता और डिजाइन सीधे विमान की गति और प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। भारत लंबे समय से आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन की जरूरत महसूस करता रहा है।





रोल्स-रॉयस का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी भारत के साथ मिलकर भारत की जरूरत के हिसाब से नया इंजन विकसित करने की बात कर रही है। प्रस्तावित इंजन की ताकत 120 किलो न्यूटन से अधिक होगी। भविष्य में इसे 145 किलो न्यूटन तक बढ़ाने की गुंजाइश रखी गई है। तकनीक हस्तांतरण यानी ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) का मतलब केवल तैयार इंजन देना नहीं है। इसका उद्देश्य इंजन बनाने की जरूरी तकनीकी जानकारी और क्षमता भारत में विकसित करना है। रोल्स-रॉयस के प्रस्ताव में भारत को पूरी तकनीक देने और विकसित की जाने वाली तकनीक के आईपीआर भारत के पास रखने की बात सामने आई है। इसका महत्व इसलिए है कि भविष्य में भारत इस तकनीक के आधार पर इंजन में सुधार और उसके दूसरे इस्तेमाल पर ज्यादा स्वतंत्रता हासिल कर सकता है।
