
रांची : राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भाजपा को आज युवाओं के भविष्य, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। अपने पूरे शासनकाल में भाजपा ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण, विनिवेश और सरकारी निवेश में कटौती की नीति को बढ़ावा दिया। जब देशभर के NEET अभ्यर्थी जंतर-मंतर पर अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, तब भाजपा के नेता न तो उस आंदोलन में छात्रों के साथ खड़े दिखाई दिए और न ही सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में मुखर नजर आए। आज वही लोग झारखंड के छात्रों के मुद्दों पर अचानक संवेदनशील होने का दावा कर रहे हैं। इससे उनके दोगला राजनीतिक रवैये पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि देश के सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को आधुनिक संसाधनों, शिक्षकों और शोध सुविधाओं से सशक्त बनाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण और राजनीतिक एजेंडे का माध्यम बनाने का प्रयास किया गया। शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करना होना चाहिए, लेकिन भाजपा ने शिक्षा के वास्तविक सुधार की बजाय दिखावे की राजनीति को प्राथमिकता दी। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भाजपा शासनकाल में बेरोजगारी लगातार देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में बनी रही। लाखों युवा वर्षों तक भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों की प्रतीक्षा करते रहे।
उन्होंने कहा कि आज देश का Gen Z वर्ग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति पहले से अधिक जागरूक और मुखर है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिदिन रील, वीडियो और प्रचार अभियानों के माध्यम से युवाओं को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन देश का युवा प्रतीकात्मक संवाद नहीं, बल्कि रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समान अवसर चाहता है। जब तक युवाओं की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक केवल ‘मन की बात’ और ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रम उनकी आकांक्षाओं का उत्तर नहीं बन सकते।
मंत्री ने कहा कि इसके विपरीत राज्य सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और शासकीय शुचिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में सरकार गंभीरता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई कर रही है। दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जा रहे हैं तथा छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ संवाद स्थापित कर पूरी भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि छात्रों से बात कर ऐसी पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और युवाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा भर्ती प्रक्रियाओं पर विश्वास और अधिक मजबूत हो।

