
दीपक शर्मा पहाड़ पर बना हर घर होमस्टे नहीं होता साथियों। हां, कुछ जगहे रात गुज़ारने के लिए होती हैं और कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहां पहुँचकर महसूस होता है की इस भागती हुई ज़िंदगी ने पहली बार रफ़्तार कम की हो जैसे। उत्तराखंड के केदारनाथ रोड में स्थित श्यामावन हमारे लिए सिर्फ़ साथ आठ कमरों का नाम नहीं है, हमारा ये होमस्टे उस सोच का हिस्सा है जहां सुबह अलार्म से नहीं बल्कि पक्षियों की आवाज़ से होती है। और ये बात मैं खुद से नहीं लिख रहा हूँ साथियों। ये अनुभव यहां आए हर मेहमान ने खुद मुझसे साझा किया है।
ये वो श्यामावन है जहां खिड़की खोलते ही सामने सीमेंट से बनी बिल्डिंग्स नहीं बल्कि हिमालय दिखता है। ये वही श्यामावन है जहां शामें मोबाइल की स्क्रीन पर नहीं, पहाड़ों पर बदलते रंगों के साथ बीतती हैं।
यहां आने वाले मेहमान सिर्फ़ पर्यटक नहीं होते। यहां तो वो साथी आते हैं जो शहर की भागदौड़ से कुछ दिन दूर रहना चाहते हैं। ऐसा हर परिवार यहां आना चाहता है जो अपने बच्चों को असली पहाड़ दिखाना चाहता है।
हमारी कोशिश भी मेहमानों को सिर्फ़ रहने की जगह देना नहीं है। बल्कि ऐसा अनुभव देना है जिसे यहां से घर वापिसी के बाद भी
एक एक इंसान हमेशा याद रखे।
अगर आपकी यात्रा के प्लान में सिर्फ़ घूमना ही नहीं बल्कि ठहरकर पहाड़ को महसूस करना भी शामिल हो तो शायद श्यामावन आपके सफ़र का एक छोटू सा लेकिन यादगार हिस्सा बन सकता है।

