पंचतत्व में विलीन हुए सिद्धू मूसेवाला, आखिरी बार मां ने संवारे बाल, पिता ने पगड़ी पहनाई, फैंस ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

News Aroma Media
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चंडीगढ़: पंजाब के लोक गायक शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Musewala) का मंगलवार को उनके पैतृक गांव मूसेवाला में अंतिम संस्कार कर दिया गया। सिद्धू मूसेवाला के हजारों चाहने वालों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी।

इससे पहले मूसेवाला की मां ने अंतिम यात्रा के लिए आज आखिरी बार बेटे के बाल संवारे। पिता ने पगड़ी पहनाई। मूसेवाला के सिर पर सेहरा सजाया गया।

उनकी अप्रैल महीने में ही शादी होनी थी। ताबूत में लिटाए गए बेटे को मां-पिता एकटक निहारते रहे। यह देखकर वहां मौजूदा लोगों की आंखें भर आईं।

पंचतत्व में विलीन हुए सिद्धू मूसेवाला, आखिरी बार मां ने संवारे बाल, पिता ने पगड़ी पहनाई, फैंस ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

सिद्धू मूसेवाला की रविवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद उसका शव मानसा के अस्पताल में रखा गया था।

मंगलवार सुबह अस्पताल से सिद्धू का शव उनके पैतृक गांव ले जाया गया। सिद्धू के शव को अंतिम दर्शनों तथा अंतिम रस्मों के लिए उनके द्वारा गांव में बनाई जा रही हवेली में रखा गया। सिद्धू बड़ी रीझ के साथ हवेली बनवा रहे थे। वह इसी हवेली में शादी करना चाहते थे।

पंचतत्व में विलीन हुए सिद्धू मूसेवाला, आखिरी बार मां ने संवारे बाल, पिता ने पगड़ी पहनाई, फैंस ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

आने वाले दिनों में इन्हीं खेतों में सिद्धू की यादगार बनाई जाएगी

पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधवा, कांग्रेस नेता परगट सिंह, कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग,पंजाबी गायक एमी विर्क, सोनिया मान, गुरदास मान समेत सैकड़ों जनप्रतिनिधियों, पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने मूसा गांव पहुंचकर सिद्धू को श्रद्धांजलि भेंट की।

इसके बाद हवेली से अंतिम यात्रा उनके पसंदीदा 5911 ट्रैक्टर पर निकाली गई। मूसेवाला ने अपनी पसंद से 5911 ट्रैक्टर को बनवाया था। प्रशंसकों ने उनकी अंतिम यात्रा को लास्ट राइड का नाम दिया जो उनकी अंतिम एलबम थी।

आने वाले दिनों में इन्हीं खेतों में सिद्धू की यादगार बनाई जाएगी

गांव की गलियों से होते हुए उनका शव खेतों में पहुंचाया गया। भारी भीड़ को देखते हुए परिजनों तथा प्रशासन ने उनका अंतिम संस्कार उन्हीं खेतों में किया जहां सिद्धू मूसेवाला खेती करते थे। आने वाले दिनों में इन्हीं खेतों में सिद्धू की यादगार बनाई जाएगी।

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