
मसूरी : सेंट जार्ज कॉलेज निचले मसूरी के बारलोगंज में लगभग 400 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह मसूरी में वेवर्ली के बाद अस्तित्व में रहने वाला दूसरा सबसे पुराना स्कूल है। इसकी शुरुआत साल 1853 में “मैनर हाउस” नाम की एक कुटिया से हुई थी, जिसे मूल रूप से मिस्टर हटन ने बनाया था। बाद में मिस्टर कारली ने इस संपत्ति को खरीदा और जनवरी 1853 में यहां पहले छात्रों को दाखिला मिला। इसी वजह से आज भी यहां के छात्रों को ‘मैनोराइट्स’ कहा जाता है। इस स्कूल को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य रोमन कैथोलिक लड़कों को शिक्षित करना था, जो पटना के रोमन कैथोलिक आर्चबिशप की प्रेरणा से हुआ था।
शुरुआत में साल 1853 से लेकर 1894 तक इस स्कूल की देखरेख कैपुचिन फादर्स द्वारा की गई। साल 1894 में उन्होंने धार्मिक कारणों से स्कूल छोड़ने का फैसला किया, जिसके बाद स्कूल की कमान पैट्रीशियन ब्रदर्स को सौंप दी गई। तब से लेकर आज तक वे ही इस स्कूल का संचालन कर रहे हैं।
शुरुआती दौर में इस स्कूल का पाठ्यक्रम इस तरह तैयार किया गया था ताकि छात्र थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग रुड़की, सर्वे विभाग और सेना के लिए तैयार हो सकें। सेंट जॉर्ज्स के सेना के साथ हमेशा से गहरे संबंध रहे, क्योंकि यह सेना के अनाथ बच्चों को आश्रय देता था और इसे लंबे समय तक सरकारी सैन्य मदद भी मिलती रही। वर्तमान में यह स्कूल आई.सी.एस.ई. बोर्ड से जुड़ा हुआ है।
इस स्कूल का इतिहास कई मशहूर हस्तियों से जुड़ा है। यहाँ से पढ़े कई छात्रों ने खेलों में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते हैं। सेना के क्षेत्र में यहाँ से पूर्व मुख्य सेनाध्यक्ष जनरल शंकर रॉय चौधरी, एयर चीफ मार्शल डी. ला फोंटेन, और पूर्व उप-सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल स्टेनली मेनेजेस जैसे बड़े अधिकारी निकले हैं। विज्ञान और खोज के क्षेत्र में अंटार्कटिका अभियान के नेता हर्ष के. गुप्ता और 29 मई 1965 को माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाले पहले भारतीय दल के सदस्य मेजर हरपाल सिंह अहलूवालिया भी यहीं के छात्र रहे हैं। इसके अलावा, सिनेमा की दुनिया के जाने-माने अभिनेता सईद जाफ़री ने भी इसी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी।

