झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को

झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CBI जांच की मांग

Neeral Prakash
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रांची : झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई कर सकता है। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर दायर याचिका में मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से कार्यकर्ता हरिशरण देवगण द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर सकती है।

सीआईडी से सीबीआई को जांच सौंपने की मांग

याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है। इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा 19 अप्रैल 2026 को विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025 की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े आरोपों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) से लेकर CBI को सौंपने की मांग की है। याचिका में लोक सेवकों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

प्रश्नपत्र से लेकर ओएमआर और सर्वर तक जांच की मांग

याचिका में कहा गया है कि मामले को केवल कुछ उम्मीदवारों से जुड़े कथित अनियमितताओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। जांच में परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाना चाहिए।

इसमें प्रश्नपत्र की छपाई, कोडिंग, भंडारण, परिवहन और वितरण के साथ-साथ ओएमआर शीट के संग्रह, स्कैनिंग, मूल्यांकन और परीक्षा से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक डेटा तक पहुंच की जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने मूल ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज, सर्वर ऑडिट रिकॉर्ड समेत सभी महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश की भी मांग की है।

परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं

याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल आरोपों या विरोध-प्रदर्शनों के आधार पर परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं की जा रही है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, पहले स्वतंत्र और समयबद्ध जांच के जरिए कथित अनियमितताओं की प्रकृति और उसके प्रभाव का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।

इसके बाद वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाना चाहिए कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों की विश्वसनीयता बरकरार है या नहीं।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। अदालत मामले में क्या रुख अपनाती है और जांच को लेकर क्या निर्देश देती है, यह सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।

 

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।