

नयी दिल्ली: उच्चतम न्ययालय ने सोमवार को कर्नाटक सरकार से कहा कि वह तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के संबंध में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश का पालन सुनिश्चित करे।





तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष दावा किया कि प्राधिकरण के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, वहीं कर्नाटक सरकार ने कहा कि जो तस्वीर पेश की जा रही है, वह ‘‘सच नहीं’’ है।
कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया था कि वह 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़े। बाद में प्राधिकरण ने इस फैसले को बरकरार रखा।
सोमवार को, तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसमें कर्नाटक सरकार को तुरंत पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। यह सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई।
पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले को एक हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध किया जाए, ताकि पानी छोड़े जाने के बारे में अदालत को अवगत कराया जा सके।’’ पीठ ने मामले को 24 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
न्यायालय ने कहा, ‘‘प्राधिकरण के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।’’
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने पीठ को बताया कि प्राधिकरण के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है और राज्य किसानों को पानी नहीं दे पा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (कर्नाटक ने) कर्नाटक में सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, और तमिलनाडु को पानी नहीं मिल रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अभी उनके बांध में 76 प्रतिशत पानी है और उन्होंने बहुत कम पानी छोड़ा है।’’
पीठ ने कर्नाटक सरकार से पूछा, ‘‘आप पानी क्यों नहीं छोड़ रहे हैं?’’
कर्नाटक सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने जवाब दिया कि अदालत के सामने जो तस्वीर पेश की जा रही है, वह ‘‘हर दृष्टिकोण से पूरी तरह से गलत’’ है।
कावेरी बेसिन के बारे में दीवान ने कहा कि वहां पानी की भारी कमी है और प्राधिकरण इस स्थिति को लेकर सजग है तथा उसने निर्देश जारी किए हैं।
सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को शीर्ष अदालत का रुख कर कर्नाटक सरकार को तुरंत पानी छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
