नयी दिल्ली : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर पर कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध संबंधी एक नयी याचिका का उच्चतम न्यायालय में तत्काल सुनवाई के लिए बुधवार को उल्लेख किया गया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुम्पारा ने इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर रही है। नेदुम्पारा ने कहा, “मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। माननीय न्यायालय इस मामले को खारिज कर सकता है, लेकिन रजिस्ट्री को इसे नंबर देकर सूचीबद्ध करने दिया जाए।” एक और याचिकाकर्ता ने खुद पेश होकर कहा कि लोकसभा की जांच समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “समानता और समान व्यवहार होना चाहिए; इस अदालत के पास प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की शक्ति है।”
प्रधान न्यायाधीश ने हालांकि याचिका को सूचीबद्ध करने के बारे में कुछ नहीं कहा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गत 21 सितंबर को वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और विशेष जांच दल या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। इससे पहले अगस्त में, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध संबंधी घनश्याम उपाध्याय की जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। भारी मात्रा में नकदी मिलने की बात तब सामने आई, जब 14 मार्च, 2025 को होली की रात लगभग 11:35 बजे दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में आग लग गई, जिसके बाद दमकल विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग बुझाई।
नकदी मिलने से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया और फिर उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था।


