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धारा 304 “गैर इरादतन हत्या” पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चोट लगने के लंबे समय बाद मौत पर भी सजा नहीं होगी कम

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नई दिल्ली: धारा 304 गैर इरादतन हत्या (Indian Penal Code Section 304) के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

जिसमें कोर्ट (Court) ने साफ कर दिया है कि पीड़ित को चोट लगने और मौत होने के बीच ज्यादा समय बीतने के बाद भी अपराधी की जिम्मेदारी कम नहीं होगी।

यानि कि अपराधी का दोष सिर्फ इसलिए कम नहीं हो सकता है कि व्यक्ति की मौत (Death) चोट लगने के लंबे समय बाद हुई।

बता दें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गैर इरादतन हत्या के एक मामले पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है कि जब किसी अभियुक्त द्वारा दी गई चोटों के कारण काफी समय बीत जाने के बाद पीड़ित की मृत्यु हो जाती है तो यह हत्या के मामले में अपराधी की जिम्मेदारी को कम नहीं करेगा।

हर मामले की अपनी अनूठी तथ्य स्थिति होती है

जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस एस. रवींद्र भट (S. Ravindra Bhat) की पीठ ने कहा कि यहां ऐसी कोई रूढ़िवादी धारणा या सूत्र नहीं हो सकता है कि जहां पीड़ित की मौत चोट लगने के कुछ समय के अंतराल पर हो जाए और उसमें अपराधी के अपराध को गैर इरादतन ही माना जाए।

कोर्ट ने कहा कि हर मामले की अपनी अनूठी तथ्य स्थिति होती है। हालांकि किसी केस में जो महत्वपूर्ण है वह चोट की प्रकृति है और क्या यह सामान्य रूप से मौत की ओर ले जाने के लिए पर्याप्त है”।

कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामले में चिकित्सा पर कम ध्यान दिए जाने जैसे तर्क प्रासंगिक कारक नहीं हैं।

कार्डियो रेस्पिरेटरी फेलियर के कारण हुई थी मौत

इसमें आगे कहा गया है कि इस मामले में चिकित्सकीय ध्यान की पर्याप्तता या अन्यथा कोई प्रासंगिक कारक नहीं है, क्योंकि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी फेलियर (Cardio Respiratory Failure) के कारण हुई थी, जो चोटों के परिणामस्वरूप हुई थी।

“इस प्रकार चोटें और मृत्यु निकट और सीधे जुड़े हुए थे।” सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ताओं के वकील ने आग्रह किया था कि हमले के 20 दिन बाद पीड़िता की मृत्यु हो गई थी, और ऐसे समय की चूक से पता चलता है कि चोटें प्रकृति के सामान्य क्रम में मृत्यु (Death) का कारण बनने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। मगर कोर्ट ने इन तथ्यों को खारिज कर दिया गया।

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