तेजस्वी भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने में जुटे!

News Desk
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पटना: बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के हाल में तेलंगाना और तमिलनाडु के दौरे के बाद यह कयास लगाए जाने लगा है कि तेजस्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने या ऐसे दलों से अपनी राजनीतिक दोस्ती बढ़ाने में जुटे हैं। इस मामले में हालांकि राजद के नेता खुलकर बात नहीं कर रहे हैं।

बिहार विधानसभा में सोमवार को वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया जाना था, लेकिन विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव तमिलनाडु पहुंच गए और वहां तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की आत्मकथा पर लिखी पुस्तक के विमोचन में शमिल हुए। इसके बाद तेजस्वी ने स्टालिन से मुलाकात की। तेजस्वी कार्यक्रम में पहुंचे कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात की।

इससे पहले जनवरी में तेजस्वी यादव तेलंगाना भी पहुंचे जहां उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से मुलाकात की थी। उस समय तेजस्वी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री की मुलाकात को शुरूआत बताया जा रहा था, लेकिन इसके मायने बड़े निकाले जा रहे हैं।

इसके बाद तेजस्वी के तमिलनाडु जाकर वहां के मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद तय माना जा रहा है कि राजद ने राज्य के बाहर अन्य क्षेत्रीय दलों से राजनीतिक दोस्ती बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसका मकसद भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए दलों को एकजुट करने का प्रयास माना जा रहा है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से मिलने के बाद तेजस्वी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, तमिलनाडु देश में मानव विकास सूचकांकों में सर्वोच्च स्थान रखता है क्योंकि यहां गैरबराबरी, सामाजिक असमानता और विषमता को मिटाने के लिए देश में सबसे अधिक आरक्षण, 69 फीसदी का प्रावधान है।

तमिलनाडु मॉडल की सफलता आरक्षण, मेरिट इत्यादि से सबंधित कई मिथकों को तोड़ती है। तमिलनाडु अनेक मायनों में एक अनुकरणीय राज्य रहा है तथा हमें ऐसे विकसित प्रदेशों से सीखना चाहिए।

तेजस्वी यादव के इस दौरे में नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं के साथ मौजूद रहे थे।

इस बीच, राजद इस मुलाकात को लेकर ज्यादा खुलकर नहीं बोल रहे। राजद के नेता इसे राजनीतिक लोगों की मुलाकात और शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं।

राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय छवि से दुश्मन घबरा गए हैं। बहुत कम दिनों में तेजस्वी की राजनीति में अलग छवि बन गई है। उन्होंने कहा कि नेताओं के बीच अक्सर मुलाकात होती रहती है।

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