समय पर चिकित्सीय मदद मिलती तो बच जाती कई लोगों की जान: वियतनाम नौका हादसे के पीड़ित

Archana Ekka
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

हैदराबाद/अमरावती : वियतनाम में पर्यटकों की एक नौका के पलटने की घटना में जीवित बचे लोगों ने घटना स्थल पर समय पर चिकित्सीय तैयारी और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी पर नाराजगी जताई। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई।
पीड़ितों ने कहा कि उन्होंने समुद्र से निकाले गए साथी यात्रियों की जान बचाने की नाकाम कोशिश में खुद ही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया। वियतनाम नौका हादसे में जीवित बचे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुल 20 पर्यटक रविवार देर रात को वियतनाम से विमान के जरिए हैदराबाद पहुंचे।

शनिवार को वियतनाम के ‘आन थोई पोर्ट’ लौटते समय फू क्वोक द्वीप के पास ‘होन मे रुट न्गोई’ के पास 32 भारतीय सैलानी, चालक दल के तीन सदस्य और एक सहायक को ले जा रही एक टूरिस्ट स्पीडबोट पलट गई। इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई और 21 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। राजमुंदरी के रहने वाले और एक मोबाइल कंपनी के कर्मचारी गोविंद ने द्वीप पर बिताए मुश्किल पलों के बारे में बताया। मोबाइल कंपनी ने ही उनकी इस यात्रा का आयोजन किया था। गोविंद ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, ‘‘द्वीप पर कोई सही चिकित्सा टीम नहीं थी। हमें जितनी जानकारी थी उसी के हिसाब से हमने हर संभव प्रयास किया। हमने सीपीआर दिया और लोगों को जिंदा रखने की कोशिश की लेकिन कई लोगों ने हमारी आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया। अगर प्रशिक्षित चिकित्सक, ऑक्सीजन सपोर्ट और बुनियादी आपात सुविधाएं होतीं तो उनमें से कुछ लोगों की जान बच सकती थी।’’

गोविंद के अनुसार, नौका पर 35 लोग सवार थे और कई लोगों को समुद्र से बचाया गया, लेकिन द्वीप पर सीपीआर देने या आपात उपचार के लिए कोई प्रशिक्षित चिकित्सक नहीं था। उन्होंने बताया कि नौका पलटने के तुरंत बाद नौका के चालक दल, जेट स्की संचालक और उनके समूह के लोगों ने यात्रियों को बचाने की कोशिश की। हालांकि, पेशेवर चिकित्सीय मदद बहुत देर से पहुंची। उन्होंने कहा, ‘‘सभी ने मदद करने की कोशिश की। हम कुछ लोगों को बचाने में कामयाब रहे, लेकिन आधिकारिक मेडिकल मदद बहुत देर से पहुंची। हमने एयर एम्बुलेंस की मांग की लेकिन बताया गया कि वह उपलब्ध नहीं है। कुछ समय बाद एम्बुलेंस नौका आईं और गंभीर रूप से घायल लोगों को बाद में वहां से ले जाया गया।’’ इस यात्रा पर आंध्र प्रदेश से गए 29 पर्यटकों में से 26 की जान बच गई जबकि तीन की मौत हो गई।

गोविंद दूसरी नौका में यात्रा कर रहे थे जब लगभग 400 मीटर दूर यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘पहली नौका पहले ही निकल चुकी थी जबकि हम यात्रा शुरू करने की तैयारी कर रहे थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अचानक हमने देखा कि नौका पलटने से पहले एक तरफ झुक गई। हमने लोगों को मदद के लिए पुकारते सुना और तुरंत उनकी ओर भागे।’’ नौका पलटने की घटना में जीवित बचे लोगों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि तेज लहरों के कारण कप्तान को नाव की गति धीमी करनी पड़ी, जिससे यात्रियों में घबराहट फैल गई। जब डरे हुए यात्री एक तरफ खिसके तो नौका का संतुलन बिगड़ गया। नौका और ज्यादा झुक गई और आखिरकार पलट गई।
बहुत से लोगों के लिए यह त्रासदी बेहद निजी थी।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।