
Workplace Wellness : आज के समय में वर्कप्लेस वेलनेस चर्चा का एक अहम हिस्सा बन चुका है, क्योंकि अधिकतर लोग अपने दिन का बड़ा हिस्सा काम के माहौल में बिताते हैं। काम का दबाव, लगातार डेडलाइन और बढ़ती जिम्मेदारियां कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित कर रही हैं। इसी बीच विशेषज्ञों का कहना है कि “वर्क बाउंड्रीज़” यानी काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय करना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार काम में डूबे रहना, देर रात तक ईमेल का जवाब देना और हर समय उपलब्ध रहना भले ही समर्पण का संकेत लगे, लेकिन लंबे समय में यह तनाव, थकान, नींद की समस्या और बर्नआउट का कारण बन सकता है। जब काम निजी जीवन में हस्तक्षेप करने लगता है, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
गुरुग्राम स्थित एडेयू माइंडफुलनेस, फोर्टिस हेल्थकेयर की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट रोशनी संधि अब्बी का कहना है कि कार्यस्थल पर सीमाएं तय करना कमिटमेंट की कमी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम है। उनके अनुसार, इससे कर्मचारी अपने समय, ऊर्जा और कार्यभार को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं और अधिक उत्पादक बनते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सीमाएं तय करने से कर्मचारियों में आत्मनिर्भरता और नियंत्रण की भावना बढ़ती है, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं और कार्यस्थल पर रिश्ते भी मजबूत होते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल कर्मचारियों पर ही तनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। उच्च दबाव वाले समय में मैनेजर्स की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
इंटरनेशनल SOS के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. विक्रम वोरा के अनुसार, लगातार दबाव और बिना समर्थन के काम करने से कर्मचारी बर्नआउट और उत्पादकता में गिरावट का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
मैनेजर्स को सलाह दी गई है कि वे काम की प्राथमिकताएं स्पष्ट करें, अनावश्यक कार्यों को हटाएं और टीम को यह स्पष्ट बताएं कि किन कामों को तुरंत करना जरूरी नहीं है। इसके अलावा, कर्मचारियों के तनाव को स्वीकार करना, खुलकर संवाद करना और छोटे ब्रेक को बढ़ावा देना भी जरूरी बताया गया है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि लचीले कार्य समय, रिमोट या हाइब्रिड वर्क और समय पर सराहना देने से कर्मचारियों का तनाव कम होता है और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है।
अंत में, विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष दिया कि काम की सीमाएं तय करना और उन्हें सम्मान देना आज के कार्यस्थल की सबसे जरूरी जरूरत बन गई है, जिससे कर्मचारी और संगठन दोनों को फायदा होता है।

