
हर साल 25 मई को दुनिया भर में विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को थायरॉइड ग्रंथि और उससे जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की यह छोटी ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज़्म, ऊर्जा स्तर, हार्मोन संतुलन, मूड और शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है।
थायरॉइड की समस्या अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके लक्षण सामान्य थकान या तनाव जैसे लगते हैं, इसलिए लोग लंबे समय तक इसे पहचान नहीं पाते। यही कारण है कि थायरॉइड जागरूकता आज एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय बन चुका है।
विश्व थायरॉइड दिवस की शुरुआत
विश्व थायरॉइड दिवस की शुरुआत 25 मई 2008 को यूरोपियन थायरॉइड एसोसिएशन और अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन द्वारा की गई थी। आज यह अभियान 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य थायरॉइड रोगों की जल्द पहचान, सही इलाज और लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
विश्व थायरॉइड दिवस 2026 की थीम
विश्व थायरॉइड दिवस 2026 की थीम है: “लक्षणों के दिखने और समय पर बीमारी की पहचान होने के बीच के अंतर को खत्म करना।” इस वर्ष का मुख्य फोकस लोगों को शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने और समय पर विशेषज्ञ से जांच कराने के लिए प्रेरित करना है।
थायरॉइड से जुड़े आम विकार
1. हाइपोथायरॉइडिज़्म
इस स्थिति में थायरॉइड हार्मोन कम बनते हैं। इसके कारण थकान, वजन बढ़ना, रूखी त्वचा, ठंड अधिक लगना और उदासी जैसी समस्याएं होती हैं।
2. हाइपरथायरॉइडिज़्म
इसमें थायरॉइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगते हैं। इसके लक्षणों में तेजी से वजन घटना, घबराहट, तेज धड़कन और अधिक पसीना आना शामिल है।
3. हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरॉइड पर हमला करती है। समय के साथ यह हाइपोथायरॉइडिज़्म का कारण बन सकती है।
4. ग्रेव्स रोग
यह भी एक ऑटोइम्यून विकार है, जो थायरॉइड को अत्यधिक सक्रिय बना देता है और आंखों से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है।
थायरॉइड स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम
थायरॉइड को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है। अगर लगातार थकान, वजन में बदलाव या मूड स्विंग जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर पहचान और सही इलाज से थायरॉइड रोगों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

