
“नौतपा” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — नव और तपा, यानी लगातार नौ दिनों तक पड़ने वाली तीव्र गर्मी। यह समय तब शुरू होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। भारतीय ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में इसे वर्ष का सबसे गर्म दौर माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक प्रभाव डालती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।
2026 में नौतपा कब शुरू होगा?
सामान्य पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में नौतपा:
25 मई 2026 से शुरू होगा
2 जून 2026 तक रहेगा
हालांकि, स्थान और पंचांग के अनुसार तारीखों में थोड़ा अंतर संभव है।
आयुर्वेद में नौतपा का महत्व
आयुर्वेद में ग्रीष्म ऋतु को पित्त बढ़ाने वाली ऋतु माना गया है। इस समय शरीर में जल की कमी होने लगती है और कमजोरी, थकान तथा चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अधिक गर्मी शरीर की रस धातु को प्रभावित करती है, जिससे डिहाइड्रेशन और जलन की समस्या हो सकती है।
आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?
आधुनिक चिकित्सा के अनुसार नौतपा के दौरान:
हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है
शरीर तेजी से पानी खोता है
ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है
थकावट, एसिडिटी और स्किन रैशेज की समस्या बढ़ सकती है
अत्यधिक तापमान में शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है।
नौतपा में क्या खाना चाहिए?
इस दौरान हल्का और ठंडक देने वाला भोजन लेना फायदेमंद माना जाता है। जैसे:
खीरा
तरबूज और खरबूजा
नारियल पानी
बेल का शरबत
छाछ और जौ का पानी
मूंग दाल और सीमित मात्रा में घी
आयुर्वेद में धनिया पानी, गुलकंद, मिश्री, आंवला और सीमित मात्रा में एलोवेरा रस भी लाभकारी बताए गए हैं।
किन चीजों से बचें?
नौतपा में:
ज्यादा मसालेदार और तला भोजन
अत्यधिक चाय-कॉफी
शराब और धूम्रपान
खाली पेट धूप में निकलना
बहुत ठंडा फ्रिज का पानी
इनसे बचना चाहिए
जरूरी सावधानियाँ
दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप से बचें
सूती कपड़े पहनें
खूब पानी और ORS लें
पर्याप्त आराम और नींद लें
अधिक मेहनत और भारी व्यायाम से बचें
आयुर्वेदिक दिनचर्या में गुलाब जल, चंदन और पैरों के तलवों में घी लगाने को भी लाभकारी माना गया है।
लू के लक्षण पहचानें
अगर तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, अत्यधिक प्यास, शरीर का बहुत गर्म होना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

