विश्व कछुआ दिवस पर जानें धरती के सबसे प्राचीन जीव के बारे में

Manu Shrivastava
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कछुए धरती पर पाए जाने वाले सबसे प्राचीन जीवों में से एक हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनके पूर्वज लगभग 36 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर अस्तित्व में आए थे। जब धरती पर 90 प्रतिशत जीवन किसी बड़े प्राकृतिक बदलाव के कारण समाप्त हो गया, तब भी कछुए जीवित रहने में सफल रहे। उनकी खासियत यह रही कि वे भूमि और जल दोनों में रहने में सक्षम हैं, जिससे वे बदलते वातावरण में भी खुद को बचा पाए।

लंबी उम्र के लिए प्रसिद्ध कछुए

कछुए अपनी लंबी आयु के लिए भी जाने जाते हैं। विभिन्न प्रजातियों के अनुसार उनकी उम्र अलग-अलग होती है, लेकिन अधिकांश कछुए लंबे समय तक जीवित रहते हैं। पालतू कछुए 10 से 80 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं, जबकि बड़े समुद्री कछुए 100 वर्ष से भी अधिक उम्र तक जी सकते हैं। यही कारण है कि कछुए को दीर्घायु और धैर्य का प्रतीक माना जाता है।

प्रजनन और जीवन से जुड़ी विशेषताएं

कछुओं का जीवन चक्र भी बेहद रोचक होता है। मादा कछुआ अंडे देने के लिए समुद्र से निकलकर रेतीली जमीन पर आती है और वहीं गड्ढा बनाकर अंडे देती है। इसके बाद छोटे कछुए अपने जन्म स्थान की बजाय अन्य स्थानों की ओर बढ़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और विकास में मदद मिलती है।

खतरे में कछुओं का अस्तित्व

इतिहास में मजबूत जीव होने के बावजूद आज कछुओं की कई प्रजातियां खतरे में हैं। मानव गतिविधियों के कारण लगभग सात में से छह प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं। मछली पकड़ने के जाल, अवैध शिकार और अंडों के व्यापार ने इनके अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

विशाल कछुए और उनकी घटती संख्या

दुनिया में विशाल कछुए मुख्य रूप से गैलापागोस द्वीप और हिंद महासागर के अलदाबरा द्वीपों पर पाए जाते हैं। 16वीं सदी में इनकी संख्या लगभग 2.5 लाख थी, लेकिन शिकार के कारण 1970 के दशक तक यह घटकर केवल तीन हजार रह गई। संरक्षण प्रयासों से अब इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

टर्टल डे और संरक्षण का संदेश

हर साल 23 मई को विश्व टर्टल डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को कछुओं और उनके आवास के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। वर्ष 2000 से अमेरिकन टॉरटॉइज रेस्क्यू संस्था द्वारा इस दिवस का आयोजन किया जा रहा है, जो कछुओं के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।

कछुओं की अनोखी जीवनशैली

समुद्री कछुए, जिन्हें ग्रीन टर्टल भी कहा जाता है, समुद्र में रहते हुए भी भोजन और जीवन के लिए प्राकृतिक संतुलन पर निर्भर रहते हैं। वहीं स्थलीय कछुए ठंड के मौसम में जमीन के नीचे चले जाते हैं और कवच उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा होती है। चाहे जल हो या थल, कछुओं का जीवन प्रकृति के संतुलन का अद्भुत उदाहरण है।

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