Amazon ने कानूनी लड़ाई खत्म करने के लिये फ्यूचर रिटेल के सामने रखा बातचीत का प्रस्ताव

News Desk
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नयी दिल्ली: अमेजन ने फ्यूचर रिटेल के साथ अपनी कानूनी लड़ाई खत्म करने के लिये गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इसे बातचीत के जरिये हल करने का प्रस्ताव रखा। दोनों कंपनियां कई अदालतों में एक-दूसरे के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई को लड़ रही हैं।

अमेजन की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वकील गोपाल सब्रमणियम ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ को कहा कि यह लड़ाई बहुत लंबी चल रही है और उन्होंने इसे खत्म करने के लिये फ्यूचर रिटेल के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखा। खंडपीठ के अन्य सदस्य जस्टिस ए एस बोपन्न और हिमा कोहली थे।

अमेजन के इस प्रस्ताव पर फ्यूचर रिटेल की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अब अमेजन के देवताओं को हम नश्वर जीवों से बात करने के लिये जमीन पर उतरना होगा।

अमेजन के पैरवीकार सुब्रमणियम ने कहा कि हमारा हमेशा से मानना रहा है कि मामले को अन्य तरीके से भी निपटाया जा सकता है। इसके लिये हमें साथ बातचीत करनी होगी।

दोनों पक्षों की दलील सुनकर खंडपीठ ने कहा कि अगर दोनों पक्षा आपसी सहमति से मामले को सुलझाना चाहते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है।

साल्वे ने हालांकि यह भी कहा कि अगर अमेजन बातचीत करना चाहता है तो उसके बॉस को कौन फ्यूचर रिटेल के अध्यक्ष किशोरी बियानी को फोन करने से रोक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानूनी लड़ाई में कोई नहीं जीतेगा।

साल्वे की इस दलील पर चीफ जस्टिस ने कहा कि यह कहने के बजाय कि अमेजन के बॉस को फोन करना चाहिये, आप ही क्यों नहीं दोनों पक्षों की बातचीत को संभव बनाते हैं। इस पर साल्वे ने कहा कि उन्हें ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं है।

साल्वे ने कहा कि सुप्रीम इस मामले में इस सप्ताह के बाद सुनवाई कर सकती है। खंडपीठ ने इसके बाद मामले की सुनवाई 15 मार्च तक के लिये स्थगित कर दी ताकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो सके।

खंडपीठ ने कहा कि अगर दोनों पक्षों को कोई समाधान मिलता है तो अदालत को बतायें। शीर्ष अदालत उसे सुनेगा और अपना आदेश पारित करेगा।

खंडपीठ ने साथ ही यह कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह लड़ाई राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण और दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट इनसे कहा कि वे अभी इस मामले में अपने आदेश जारी न करें और दोनों पक्षों को बातचीत करने का मौका दें।

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