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सेंट स्टीफेंस कॉलेज दाखिले के लिए गैर अल्पसंख्यक छात्रों का इंटरव्यू नहीं ले सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज गैर अल्पसंख्यक छात्रों का दाखिले के लिए इंटरव्यू नहीं ले सकता है।

चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज को निर्देश दिया कि वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के आदेश के मुताबिक एडमिशन प्रोस्पेक्टस (Admission Prospectus) में संशोधन करके इसकी सूचना सार्वजनिक रूप से दें।

कोर्ट ने कहा कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज को गैर अल्पसंख्यक छात्रों के दाखिले के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेट टेस्ट (CUET) के स्कोर को सौ फीसदी मानना होगा।

इस मामले में कोर्ट ने 31 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 6 जुलाई को हलफनामा दाखिल कर कहा था कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज को भी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेट टेस्ट (CUET) के तहत ही दाखिला की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकार करना होगा।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के उस आदेश को चुनौती दी गई है

Delhi University ने हलफनामा में कहा था कि ये निर्विवाद कानून है कि अनुदान प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थान अनारक्षित सीटों पर अपनी मर्जी से छात्रों का दाखिला नहीं कर सकते हैं।

हाईकोर्ट (HC) में सेंट स्टीफेंस और दिल्ली यूनिवर्सिटी के विवाद को लेकर दो याचिकाएं दायर की गई हैं। एक याचिका सेंट स्टीफेंस कॉलेज ने और दूसरी याचिका मोनिका पोद्दार नामक एक लॉ स्टूडेंट ने दायर की है।

सेंट स्टीफेंस कॉलेज (St Stephen’s College) की याचिका में दिल्ली यूनिवर्सिटी के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें कॉलेज में दाखिला कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के जरिये ही करने को कहा गया है।

मोनिका पोद्दार की याचिका में डीयू और सेंट स्टीफेंस कॉलेज के बीच हर साल एडमिशन को लेकर पैदा होने वाले विवाद का जिक्र किया गया है।

मोनिका की यायिका में कहा गया है कि इंटरव्यू के दौरान चयन समिति के संतोष के आधार पर मार्क्स देना भेदभावपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि आमतौर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला बारहवीं कक्षा में मिले अंकों के आधार पर होता है लेकिन सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिले के लिए अलग से Interview करना विभेद को जन्म देता है।

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