B.Tec की छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को होगी फांसी, झारखंड हाई कोर्ट ने बरकरार रखा CBI कोर्ट का फैसला

हत्या करने के बाद बगल के कमरे से मोटर में डालने के लिए रखा मोबिल उसके शरीर पर डाल दिया और आग लगा दी। फिर दरवाजा सटाकर वहां से निकल गया था। पुलिस ने मामले में बूटी बस्ती में मोबाइल कॉल डंप के आधार पर राहुल का पता लगाया गया था। करीब 300 लोगों से पूछताछ की गई थी।

News Update
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jharkhand High Court : झारखंड हाई कोर्ट ने B.Tec की छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या (Rape and murder) करने के जुर्म में जेल में बंद राहुल राज (Rahul Raj) को बेल देने से इनकार करते हुए उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने सोमवार को उसकी अपील याचिका खारिज कर दी है।

राहुल राज को रांची CBI की स्पेशल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। रांची CBI की विशेष कोर्ट ने 20 दिसंबर, 2019 को राहुल राज को दोषी करार देते हुए 21 दिसंबर उसे फांसी की सजा सुनाई थी।

आयरन के तार से घोंट दिया था गला

उल्लेखनीय है कि छात्रा 15 दिसंबर 2016 को शाम छह बजे कॉलेज से घर लौटी थी। राहुल ने उसका दिनभर पीछा किया था। 16 दिसंबर की सुबह करीब चार बजे राहुल छात्रा के घर में घुसा। ग्रिल का ताला खोला। छात्रा ने अपने कमरे को अंदर से बंद नहीं किया था।

राहुल अंदर गया और उसका गला दबाने लगा। फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब छात्रा अचेत हो गई तो आयरन के तार से गला घोंट दिया था। उसके कपड़े उतारे और बगल वाले कमरे में फेंक कर आग लगा दी थी।

300 लोगों से की गई थी पूछताछ

हत्या करने के बाद बगल के कमरे से मोटर में डालने के लिए रखा मोबिल उसके शरीर पर डाल दिया और आग लगा दी। फिर दरवाजा सटाकर वहां से निकल गया था। पुलिस ने मामले में बूटी बस्ती में मोबाइल कॉल डंप के आधार पर राहुल का पता लगाया गया था। करीब 300 लोगों से पूछताछ की गई थी।

इस दौरान पता चला कि राहुल नालंदा का रहने वाला था। उसपर पटना में भी नाबालिग से दुष्कर्म का केस (Rape Case) दर्ज है। वह लखनऊ जेल में बंद था। इसके बाद राहुल के माता-पिता और पीड़िता के स्वाब और नाखून से मिले अंश का DNA टेस्ट कराया था। इसमें राहुल की मां का डीएनए मैच कर गया। इसी सबूत के आधार पर उसे फांसी की सजा हुई थी।

Share This Article