… और इस वजह से मद्रास हाईकोर्ट की जज ने SBI पर कर दिया मुकदमा, Home Loan…

जून 2024 में दर्ज अपनी उपभोक्ता शिकायत में न्यायमूर्ति बानू ने आरोप लगाया कि बैंक और बीमा अधिकारियों ने पॉलिसी को लेकर सांठगांठ की। उनका दावा है कि SBI ने उनकी जानकारी के बिना खरीदा था।

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Madras High Court judge sued SBI: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का मद्रास हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति जे निशा बानू (J Nisha Banu) के साथ लोन विवाद चल रहा है। न्यायमूर्ति बानू ने मदुरै आयोग से आग्रह किया है कि वह न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को उन्हें 46 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दे, जो कि ब्याज सहित बीमित राशि है।

इसके अलावा बीमा फर्म और SBI को मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में 1 करोड़ रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दें।

ब्याज सहित भुगतान की गई सभी EMI को वापस करने का निर्देश दें। पॉलिसी खरीदने के लिए काटे गए 17,125 रुपये भी वापस करें। साथ ही मुकदमेबाजी लागत के लिए 50,000 रुपये का भी भुगतान करें।

बैंक ने पॉलिसी के लिए 17,125 रुपये डेबिट किए

जून 2024 में दर्ज अपनी उपभोक्ता शिकायत में न्यायमूर्ति बानू ने आरोप लगाया कि बैंक और बीमा अधिकारियों ने पॉलिसी को लेकर सांठगांठ की। उनका दावा है कि SBI ने उनकी जानकारी के बिना खरीदा था।

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक ने पॉलिसी के लिए 17,125 रुपये डेबिट किए। वहीं, SBI ने तर्क दिया कि पॉलिसी खरीद के बारे में जज को पता था।

इसने यह भी तर्क दिया कि जज ने बिल्डर से कथित खराब निर्माण के लिए मुआवजे के रूप में 38 लाख रुपये प्राप्त करने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है। बैंक ने कहा कि उन्हें आंशिक रूप से निर्मित इमारत को ध्वस्त करवाना पड़ा।

वहीं SBI ने अब होम लोन पुनर्भुगतान विवाद पर अपने खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत को तमिलनाडु से बाहर ट्रांसफर करने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) से संपर्क किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, SBI को डर है कि मदुरै में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC ) के समक्ष न्याय नहीं मिलेगा।

SBI को यह डर इसलिए है क्यों कि DCDRC मद्रास हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जज के मदुरै स्थित घर का निर्माण आंशिक रूप से हुआ था और कथित तौर पर खराब निर्माण के कारण उसे ध्वस्त कर दिया गया था।

बकाया राशि का पूरा भुगतान अभी तक नहीं किया

बैंक ने आरोप लगाया है कि जज ने नोटिस देने के बावजूद अभी तक बकाया राशि का पूरा भुगतान नहीं किया है और वह इसे अपने घर पर पॉलिसी दावे से जोड़ रही हैं जिसे न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने खारिज कर दिया था।

न्यायमूर्ति बानू ने बैंक अधिकारियों और बीमा कंपनी (Authorities and insurance company) पर मिलीभगत करके उन्हें पॉलिसी लाभ से वंचित करने का आरोप लगाया है। NCDRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति AP साही और सदस्य इंदर जीत सिंह की पीठ ने 2 अगस्त को SBI के द्वारा केस ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया और 23 सितंबर को फिर से सुनवाई के लिए तय किया।

SBI के वकील एडवोकेट जितेंद्र कुमार ने मदुरै में DCDRC के समक्ष कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने के लिए दबाव डाला। हालांकि आयोग ने कहा, आपको उचित आशंका हो सकती है, लेकिन जब बात हाईकोर्ट के जज की हो तो इतनी हल्की नहीं है। आपको कई बातें बतानी होंगी कि जिससे पता चल सके कि आपको अपने मामले में ऐसा होने की उम्मीद क्यों है? हल्के-फुल्के दावे से ज्यादा गंभीर कुछ होना चाहिए।

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