हाईकोर्ट ने दिया खराब हाईवे पर TOLL TAX नहीं लेने का आदेश, अब सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक

Digital News
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

The High Court ordered not to collect toll tax : सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि खराब स्थिति में हाईवे पर टोल टैक्स नहीं वसूला जाना चाहिए। इससे पहले हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर लखनपुर और बन्न टोल प्लाजा पर टोल शुल्क में 80 फीसदी की कटौती की थी।

हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण NH-44 पर लखनपुर और बन्न टोल प्लाजा पर 75 फीसदी की दर से टोल वसूल सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई, 2025 को होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में एक जनहित याचिका के जवाब में आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जब तक दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक एनएच-44 के लखनपुर और बन्न टोल प्लाजा पर टोल शुल्क को 80 फीसदी तक कम किया जाए।

हाईकोर्ट ने तर्क दिया था कि निर्माण कार्य के कारण राजमार्ग की खराब स्थिति के चलते यात्रियों से पूरा टोल वसूलना अनुचित यानी सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि टोल शुल्क का उद्देश्य यात्रियों को अच्छी और सुचारू सड़क प्रदान करना है और यदि सड़क खराब स्थिति में है, तो टोल वसूलना उचित सेवा के सिद्धांत का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कई अन्य निर्देश भी जारी किए थे, जिनमें टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम 60 किलोमीटर की दूरी का पालन करने, टोल कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन करने और तीर्थयात्रियों से अनुचित टोल वसूली पर रोक लगाने जैसे बिंदु शामिल थे।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जून 2024 में एक वैश्विक कार्यशाला में कहा था कि खराब सड़कों पर टोल वसूलने का कोई औचित्य नहीं है। NHAI ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने टोल दरों में हस्तक्षेप करके अपनी अधिकारिता का उल्लंघन किया है, क्योंकि टोल दरें केंद्रीय नियमों द्वारा नियंत्रित होती हैं।

सॉलिसिटर मेहता ने बताया कि NH-44 के चार से छह लेन मेंमरम्मत के दौरान पहले से ही टोल शुल्क में 25 फीसदी की कमी की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 75 फीसदी की दर पर टोल वसूला जा रहा था।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की सुप्रीम कोर्ट पीठ ने 15 अप्रैल, 2025 को अंतरिम आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश पर रोक रहेगी। कोर्ट ने NHAI को मौजूदा नियमों के तहत 75 फीसदी की दर पर टोल वसूलने की अनुमति दी और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय की है।

Share This Article