रांची: भारत के साहित्य और सूचना जगत में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। झारखंड की राजधानी रांची से बहुभाषी पब्लिशिंग हाउस “रिवाइवल भारत” के शुभारंभ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह पहल परंपरा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक पहुंच को एक साथ जोड़ते हुए साहित्य और ज्ञान के प्रसार को नई दिशा देने का लक्ष्य रखती है।
परंपरा से आधुनिकता तक – एक नया मंच
रिवाइवल भारत का उद्देश्य भारत की विविध भाषाओं में सशक्त, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का प्रकाशन करना है। यह मंच विशेष रूप से उन पाठकों और रचनाकारों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जो भारतीय बहुभाषी साहित्य को डिजिटल युग में एक नए और प्रभावशाली स्वरूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। इसके माध्यम से हिंदी, अंग्रेज़ी, भोजपुरी और संस्कृत सहित कई प्रमुख भारतीय भाषाओं में लेख, पुस्तकें और शोध सामग्री प्रकाशित की जाएंगी, जिससे देश और विदेश के पाठकों तक भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक विविधता सहज रूप से पहुंच सके।

तकनीक के माध्यम से वैश्विक विस्तार
इस पब्लिशिंग हाउस की प्रमुख विशेषता यह है कि यह पारंपरिक प्रकाशन व्यवस्था को आधुनिक डिजिटल तकनीक के साथ प्रभावी रूप से जोड़ता है। ऑनलाइन प्रकाशन, डिजिटल मीडिया और वैश्विक वितरण नेटवर्क के माध्यम से रिवाइवल भारत भारतीय लेखकों, चिंतकों और रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का कार्य करेगा। इससे साहित्यिक समुदाय को वैश्विक स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखने का सशक्त अवसर प्राप्त होगा।
रांची से विश्व तक साहित्य का प्रसार
झारखंड की राजधानी रांची से संचालित होने वाला यह प्रयास क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रिवाइवल भारत न केवल भारतीय भाषाओं की समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि नए और उभरते लेखकों को भी अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए एक विश्वसनीय मंच प्रदान करेगा।
संस्थापक के बारे में
रिवाइवल भारत के संस्थापक डॉ. विजय भास्कर एक प्रतिष्ठित संचार विशेषज्ञ, संपादक और लेखक हैं। संचार विषय में पीएचडी डॉ. भास्कर का करियर मीडिया, अकादमिक जगत और विकास संचार जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। उन्होंने मुंबई, बिहार, झारखंड, राजस्थान और विदर्भ जैसे क्षेत्रों में व्यापक प्रसार वाले प्रमुख समाचार पत्रों में संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा, उन्होंने नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन में संचार अधिकारी के रूप में भी कार्य किया है, जहाँ उनके वैश्विक दृष्टिकोण को नई दिशा मिली। इसी दौरान उन्होंने लंदन (यूके) में सेंट्रल ऑफिस ऑफ़ इंफॉर्मेशन (COI) और फॉरेन एंड कॉमनवेल्थ ऑफिस (FCO) में विशेष रिफ्रेशर कोर्स भी पूरा किया।
डॉ. विजय भास्कर अंग्रेज़ी, हिंदी और भोजपुरी – तीन भाषाओं में दक्ष संप्रेषक हैं। वे अनुवाद, सबटाइटलिंग और कंटेंट विकास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। हाल के वर्षों में उनका कार्य विज्ञान और मानविकी विषयों में द्विभाषी व त्रिभाषी शैक्षणिक सामग्री का विकास, सुलभ ज्ञान संसाधनों के निर्माण तथा डिजिटल सत्तावाद, भू-राजनीति और विकास संचार जैसे विषयों पर शोध-आधारित लेखन तक विस्तृत रहा है।
विशेषज्ञों की राय
साहित्य और प्रकाशन जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे भाषाई और सांस्कृतिक रूप से विविध देश में बहुभाषी प्रकाशन मॉडल समय की आवश्यकता है। इससे न केवल साहित्य की पहुंच व्यापक होगी, बल्कि भाषाओं का संरक्षण सुनिश्चित होगा और भारतीय विचारधारा वैश्विक पाठकों तक प्रभावी रूप से पहुंचेगी।




