

Jharkhand High Court Issues Notice: HEC के श्रमिक नेता दिवंगत राणा संग्राम सिंह के पुत्र ठाकुर जसवंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है।





इस हत्याकांड में आरोपी Om Prakash alias Guddu की रिहाई के खिलाफ राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में इक्विटील अपील दाखिल की थी।
इसी अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने आरोपी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई सुनवाई
इस मामले की सुनवाई Jharkhand High Court के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता भोलानाथ ओझा ने अदालत के सामने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। अदालत ने ओम प्रकाश उर्फ गुड्डू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
रिहाई के फैसले को दी गई चुनौती
राज्य सरकार ने आरोपी ओम प्रकाश उर्फ गुड्डू को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
दरअसल, सितंबर 2024 में अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार सिंह की अदालत ने इस हत्याकांड में तीन आरोपियों—मृतक के चचेरे ससुर अमर सिंह, चचेरे भाई वंश नारायण सिंह और उनके पुत्र रणधीर सिंह—को दोषी करार दिया था।
अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और साथ ही प्रत्येक पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
हालांकि, उसी फैसले में अदालत ने ओम प्रकाश उर्फ गुड्डू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। इसी बरी किए जाने के फैसले से राज्य सरकार असहमत है और उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जमीन और बस संचालन विवाद बना हत्या की वजह
यह सनसनीखेज हत्या (Murder) 9 अक्टूबर 2015 को हुई थी। घटना रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत वीर कुंवर सिंह चौक के पास सुबह करीब 8 बजे की है।
जानकारी के अनुसार, जमीन और बस संचालन को लेकर चल रहे पुराने विवाद के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया था।
मॉर्निंग वॉक के दौरान हमला
बताया जाता है कि आरोपी पहले से ही घात लगाए बैठे थे। ठाकुर जसवंत सिंह रोज की तरह सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे।
इसी दौरान मौका पाकर अभियुक्तों ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनके भाई राणा प्रताप सिंह पर भी लाठी से सिर पर हमला किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
थाना में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
घटना के तुरंत बाद धुर्वा थाना में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब, वर्षों बाद इस केस में आरोपी की रिहाई को लेकर फिर से कानूनी बहस शुरू हो गई है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
