
Palamu Tiger Reserve case : झारखंड में बाघों के संरक्षण से जुड़े एक अहम मामले पर Jharkhand High Court में सुनवाई हुई। यह जनहित याचिका विकास और वन्यजीव संरक्षण के संतुलन से जुड़ी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पलामू टाइगर रिजर्व परियोजना (Palamau Tiger Reserve Project) के कारण विस्थापित किए गए लोगों को अब तक उनकी जमीन की विधिवत रसीद नहीं दी गई है।
इससे उन्हें मालिकाना हक मिलने में परेशानी हो रही है।
विस्थापितों को नहीं मिल रही जमीन की रसीद
राज्य सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि पलामू रिजर्व क्षेत्र के दो गांवों में से एक गांव के लोगों को दूसरी जगह बसाया जा चुका है।
वहीं दूसरे गांव के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया अभी जारी है। लेकिन कोर्ट के सामने यह बात आई कि जिन लोगों को पुनर्वासित किया गया है, उन्हें अब तक जमीन की रसीद नहीं दी गई है।
हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
इस मामले पर सख्ती दिखाते हुए High Court के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि पुनर्वासित किए गए सभी लोगों को 8 सप्ताह के भीतर जमीन की रसीद मुहैया कराई जाए, ताकि उन्हें मालिकाना हक मिल सके।
NTCA से मांगा गया जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भी निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में 13 बिंदुओं पर अपना जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने साफ किया कि विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
अगली सुनवाई की तारीख
हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च तय की है। तब तक राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि विस्थापित लोगों के हक और सम्मान से जुड़ा हुआ है। High Court के इस आदेश से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

